गाजियाबाद
सौ साल पुराने मेथोडिस्ट चर्च व कब्रिस्तान में क्रॉस तोड़े जाने से ईसाई समाज में उबाल
न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर नगर पालिका की मनमानी के चलते निर्माण कार्य पर उठे सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी के लगभग 100 वर्ष पुराने मेथोडिस्ट चर्च एवं उससे जुड़े कब्रिस्तान को लेकर मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। सोमवार को कब्रिस्तान के मुख्य द्वार पर बने धार्मिक प्रतीक क्रॉस को नगरपालिका परिषद के लोगों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद ईसाई समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त हैं । ईसाई समुदाय का आरोप है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद नगर पालिका परिषद लोनी मनमाने ढंग सेइस भूमि पर कार्रवाई कर रही है और विवादित भूमि पर निर्माण कराने के साथ-साथ धार्मिक प्रतीकों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ईसाई समाज के लोगों का कहना है कि मेथोडिस्ट चर्च और उससे संबद्ध कब्रिस्तान पिछले लगभग 100 वर्षों से अस्तित्व में है तथा यह भूमि उनके वैधानिक कब्जे एवं धार्मिक उपयोग में रही है। इस भूमि से जुड़ा विवाद न्यायालय में लंबित है, इसलिए किसी भी प्रकार का निर्माण या तोड़फोड़ करना कानून और न्यायिक प्रक्रिया की भावना के विपरीत है ईसाई
समाज के लोगों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद ने न्यायालय के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करने के बजाय विवादित स्थल पर निर्माण कार्य की तैयारी शुरू कर दी। इसी क्रम में कब्रिस्तान के मुख्य द्वार पर बने ईसाई धर्म के पवित्र प्रतीक क्रॉस को तोड़ दिया गया, जिससे पूरे ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और 112 नंबर पर पुलिस को सूचना देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
ईसाई समुदाय का कहना है कि धार्मिक स्थल और धार्मिक प्रतीकों के साथ की गई इस प्रकार की कार्रवाई किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं की जा सकती। लोगों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका परिषद ने कानून और न्यायालय में लंबित मामले की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से कार्य किया है, जिससे समुदाय में गहरा असंतोष और रोष व्याप्त है।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि क्रॉस को क्षतिग्रस्त करने और विवादित भूमि पर निर्माण कराने में शामिल सभी जिम्मेदार अधिकारियों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही न्यायालय के अंतिम निर्णय तक कब्रिस्तान परिसर में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर तत्काल रोक लगाई जाए।
इस घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ईसाई समाज ने स्पष्ट किया है कि वह न्यायालय और कानून का सम्मान करता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया लंबित रहने के बावजूद यदि नगर पालिका इसी प्रकार एकतरफा कार्रवाई करती रही तो इससे धार्मिक सौहार्द और कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ईसाई समुदाय ने प्रशासन से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।


