
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग लड़की के उत्पीड़न मामले को गंभीर मानते हुए दिल्ली और यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को बचाया नहीं जाना चाहिए। कोर्ट ने एफआईआर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जुलाई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन में शामिल एक नाबालिग लड़की के उत्पीड़न के आरोपों को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि किसी को भी आपराधिक कार्रवाई करने के लिए पीड़ित या उसके परिवार को डराने-धमकाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से लड़की की एफआईआर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा और इस मामले पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारों से रिपोर्ट मांगी।
बेंच ने कहा क्या कहा?
बेंच ने कहा, ‘ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अगर किसी बच्चे के खिलाफ हिंसा का मामला हो तो किसी को भी बचाया नहीं जाना चाहिए। अगर ऐसे कामों के आरोपी खुलेआम घूम रहे हों और बच्चे या उसके परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हों ताकि वे आपराधिक कार्रवाई न करें, तो यह एक गंभीर मामला होगा।’



