शामली

महंगाई के दबाव में साठी धान की खेती करना बनी मजबूरी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
चौसाना :  गेहूं की कटाई से पूर्व किसान साठी धान की तैयारी में जुट गए हैं। बढ़ती महंगाई और खेती की लागत में वृद्धि के कारण अब किसानों के लिए साल में तीन फसलें लेना मजबूरी बन गई है, जिससे साठी धान की खेती तेजी से बढ़ रही है।
चौसाना क्षेत्र के खेतों में इस समय दोहरी हलचल देखने को मिल रही है। एक ओर गेहूं की फसल पककर तैयार है, वहीं दूसरी ओर किसान अगली फसल साठी धान की बुआई में लगे हुए हैं। किसान विशेष रूप से 1509 किस्म के बीज का उपयोग कर रहे हैं, जो कम समय में तैयार होता है और जल्दी आमदनी देता है। पहलेक्षेत्र के किसान साल में एक या दो फसलें ही लेते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। महंगाईखाद-बीज के दाम, डीजल और मजदूरी के खर्च ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दियाहै। सीमित आय के चलते किसान अब तीन फसलें लेने को मजबूर हो गए हैं। किसान साठी धान लगाते हैं, फिर उसकी कटाई के बाद कुछ दोबारा धान की खेती करते हैं, जबकि कई किसान उड़द और मक्का जैसी फसलें बोकर अतिरिक्त आमदनी का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि यदि तीन फसलें नहीं ली जाएं तो खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। प्रशासन साठी धान की खेती पर रोक की बात करता है, लेकिन किसान अरविंद, राजकुमार, मैनपाल, कुलदीप, रोहित आदि का कहना है कि जब तक उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था और बेहतर समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक वे इसे छोड़ नहीं सकते।
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