
नई दिल्ली : नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों से संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। कोर्ट ने देखा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुए और बाद में मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों तक फैले इन प्रदर्शनों के दौरान कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोप लगे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि नीट पेपर लीक के आरोपों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’के नेतृत्व में हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, बशर्ते उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न हो। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला नहीं था, लेकिन जिन्हें केवल विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में आरोपी बनाया गया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों से संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। कोर्ट ने देखा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुए और बाद में मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों तक फैले इन प्रदर्शनों के दौरान कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोप लगे थे।
याचिकाओं में पेलेट गन के इस्तेमाल का आरोप-याचिकाकतार्ओं ने कोर्ट को बताया कि छात्र कथित नीट पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। याचिकाओं के अनुसार, बल प्रयोग में लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल शामिल था। याचिकाओं में नेशनल कैपिटल टेरिटरी की कई ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया गया, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का आरोप लगाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के सामने गंभीर आरोप रखे गए
सात राज्यों को नोटिस जारी-सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल की सरकारों को नोटिस जारी करके विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित हिंसा के मामले में उनसे जवाब मांगा है। राज्यों से कहा गया है कि वे याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर अपना जवाब दें।
यह पक्का करने के लिए कि अहम सबूत खो न जाएं, सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं से जुड़े सभी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया। उम्मीद है कि यह निर्देश याचिकाकतार्ओं के आरोपों और संबंधित राज्य सरकारों के जवाबों की कोर्ट द्वारा जांच में अहम भूमिका निभाएगा।



