गोड्डा

प्रा० वि० के पारा शिक्षक लतिप अंसारी लोगों को नशा मुक्ति के लिए कर रहे जागरूक

 विगत 13 वर्षों से साइकिल से घूम- घूमकर चला रहे हैं जागरूकता अभियान।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो 
गोड्डा/ पोड़ैयाहाट : प्रखंड स्थित एक छोटे से प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले पारा शिक्षक लतिप अंसारी समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गए हैं। वे न सिर्फ बच्चों को अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि पूरे समाज को नशा जैसे सामाजिक बुराई से छुटकारा दिलाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और वह भी साइकिल के माध्यम से। 2012 से शुरू हुई नशा के खिलाफ जंग लतिप अंसारी ने वर्ष 2012 में नशा विरोधी जागरूकता यात्रा की शुरुआत की थी। तब से अब तक उन्होंने झारखंड के 22 जिलों का साइकिल से दौरा किया है। वे गांव-गांव, शहर-शहर जाकर लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि यदि एक व्यक्ति भी उनकी बातों से प्रेरित होकर नशा छोड़ता है, तो उनका प्रयास सफल हो जाता है। हर दिन 100 किलोमीटर की साइकिल यात्रा उनकी दिनचर्या आम लोगों से बिल्कुल अलग है। जहां लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं लतिप अंसारी हर दिन करीब 100 किलोमीटर साइकिल चलाकर लोगों से मिलते हैं, पोस्टर बांटते हैं, नुक्कड़ सभाएं करते हैं और नशा के दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हैं। उनके पास कोई बड़ा मंच या संसाधन नहीं है, लेकिन उनका संकल्प बेहद मजबूत है।सैकड़ों लोगों को छुड़ाया नशे की लत से उनके संपर्क में आने के बाद सैकड़ों युवाओं और ग्रामीणों ने नशा छोड़ दिया है। कुछ ने उन्हें धन्यवाद देने के लिए पत्र लिखा, तो कुछ उनके साथ अभियान में शामिल भी हुए। लतिप अंसारी नशा करने वालों को न केवल हानिकारक प्रभावों के बारे में बताते हैं, बल्कि उन्हें विकल्प भी सुझाते हैं जैसे खेल, योग, स्व-रोजगार आदि। सरकारी मदद की कमी, लेकिन हौसला अडिग अभी तक लतिप अंसारी को इस अभियान के लिए किसी प्रकार की सरकारी मदद या पुरस्कार नहीं मिला है, लेकिन इससे उनकी लगन में कोई कमी नहीं आई। वे अपने वेतन और कुछ सहयोग से इस यात्रा को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।लतिप अंसारी अब इस अभियान को झारखंड से बाहर ले जाने की योजना बना रहे हैं। वे बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी साइकिल यात्रा के माध्यम से जागरूकता फैलाना चाहते हैं। उनका सपना है कि भारत को नशा मुक्त बनाना।
लतिप अंसारी का संदेश है – नशा एक धीमा ज़हर है, जो इंसान को चुपचाप बर्बाद करता है। इसे छोड़िए, और जीवन को गले लगाइए।
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