ललितपुर

ऑनलाइन मनी गेमिंग पर केन्द्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम

अधिवक्ताओं और नागरिकों की मांग पर लोकसभा से बिल पारित

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। देशभर में युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन सट्टेबाजी और डिजिटल जुए की लत के खिलाफ आखिरकार केन्द्र सरकार ने ठोस कदम उठाया है। अधिवक्ता पुष्पेन्द्र सिंह चौहान और देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार मिल रही शिकायतों व मांगों के चलते सरकार ने ऑनलाइन मनी गेमिंग पर सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है।
लोकसभा से पारित हुआ ऐतिहासिक विधेयक
20 अगस्त, 2025 को लोकसभा ने पैसे लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस बिल का उद्देश्य युवाओं को बढ़ती लत, आर्थिक नुकसान, धन शोधन और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से बचाना है।
नए कानून के प्रमुख प्रावधान
कोई भी कंपनी, ऐप या वेबप्लेटफॉर्म अब पैसे लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम जैसे सट्टा, जुआ, लॉटरी, पोकर, रम्मी आदि की पेशकश, प्रचार या सुविधा प्रदान नहीं कर सकेगा। उल्लंघन की स्थिति में तीन वर्ष तक की सजा व 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों को ऐसे गेम्स के लिए पैसे का लेन-देन रोकना होगा। फैंटेसी स्पोर्ट्स और शिक्षाप्रद/मनोरंजनात्मक (जैसे शतरंज, सॉलिटेयर, सुडोकू आदि) गेम्स को कानून से बाहर रखा गया है।
सरकार का रुख और जनता की मांग
सरकार ने स्पष्ट किया है कि समाज और युवाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जब बात समाज के हितों की हो, प्रधानमंत्री ने हमेशा समाज को चुना है। ऑनलाइन मनी गेम्स की वजह से कई परिवार तबाह हुए हैं, आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ी हैं। अब इन पर लगाम लगाना जरूरी है। अधिवक्ता पुष्पेन्द्र सिंह चौहान सहित अनेक नागरिकों ने प्रधानमंत्री कार्यालय व विधि मंत्रालय को पत्र भेजकर तुरंत केन्द्रीय कानून बनाने की मांग की थी। उनका कहना था कि ऑनलाइन सट्टा और डिजिटल जुआ छोटे कस्बों और गांवों में भी महामारी की तरह फैल रहा है और खासतौर से 13 से 30 वर्ष के युवाओं का मानसिक व आर्थिक भविष्य संकट में डाल रहा है।
अपील और सुझाव
पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने अपने पत्र में मांग की थी कि राष्ट्रीय डिजिटल जुआ नियंत्रण कानून तुरंत लागू किया जाए। संदिग्ध ऐप्स और वेबसाइट्स को प्रतिबंधित कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। युवाओं के लिए स्कूल-कॉलेज स्तर पर काउंसलिंग और जागरूकता अभियान चलाए जाएं। साइबर सेल को तकनीकी और कानूनी संसाधन बढ़ाए जाएं। दोषियों के खिलाफ कठोर सजा और वित्तीय जब्त की व्यवस्था की जाए।
अब आगे क्या?
इस ऐतिहासिक कानून की वैधानिक शक्ल मिलते ही ऑनलाइन मनी गेमिंग से जुड़ी धोखाधड़ी, लत और सामाजिक हानि पर प्रभावी रोक की उम्मीद जगी है। सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि यदि कोई विशेष मामला है तो वह राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ज़रूरी कार्रवाई की जा सके।
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