
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। एक माह पूर्व थाना टीपीनगर में फर्जी क्राइम ब्रांच और पत्रकार बनकर एक महिला के साथ ठगी करने वाले गिरोह के सरगना को पुलिस ने गिरफतार करते हुए उसके कब्जे से एक लैपटॉप और मोबाइल बरामद किया है। उक्त सरगना फर्जी क्राइम ब्रांच व पत्रकार बनकर जबरन वसूली करता था और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाता था। विदित हो कि दिनांक 26.06.2025 की शाम को शिव हरी मन्दिर कालोनी थाना टी0पी0नगर मेरठ की रहने वाली संगीता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके घर पर तीन महिला व तीन पुरुष फर्जी क्राइम ब्रांच एवं पत्रकार बनकर घर पर पहुंचे और घर का दरवाजा खुलवाकर घर में घुसकर अपने आप को क्राइम ब्रांच व मीडिया से बताते हुए घर की तलाशी लेने लगे । संगीता के द्वारा विरोध करने पर उसे डरा धमका कर चुप करा दिया और कहा हम लोग क्राइम ब्रांच व मीडिया से हैं तुम्हारे घर पर कुछ गलत काम होता है । हमें उसकी तलाशी लेनी है और पूरे घर की तलाशी लेने लगे और सभी का वीडियो बनाने लगे । इसी बीच इनके किसी सदस्य ने घर में रखे डस्टबिन में अपने साथ लिये हुए कुछ सामान को छिपा दिया था और कहने लगे कि तुम्हारे घर के डस्टबिन से अवैध सामान बरामद हुआ है तुम्हारे खिलाफ मुकदमा लिखकर तुम लोगों को जेल भेजा जायेगा । इस सम्बन्ध में सावित्री, कविता, नीरज, दिनेश, अनिल, और जोगिन्द्र, निवासीगण अज्ञात के विरुद्ध पंजीकृत कराया गया । विवेचना से अभियुक्त विनोद कुमार गौतम पुत्र राधेलाल निवासी राजपुर कोटला थाना नारखी जिला फिरोजाबाद उम्र 36 वर्ष का नाम प्रकाश में आया। विनोद ने बताया कि उसने सीईआरटी कालेज परतापुर से एमबीए पास किया था फिर ए टेक नामक कम्पनी में काम करने लगा तथा नौकरी छूट गयी फिर गौतम ग्लोबल कम्पनी खोली, उसमें भी नुकसान हो गया था । फिर आयरन डिटर्जेंट पाउडर व साबुन बनाने व बेचने का कार्य शुरु किया । वह भी नुकसान के कारण बन्द हो गया । वर्ष 2021-2022 में विनोद ने द. पुलिस टुडे नामक एक एजेंसी बनाकर जीएसटी कार्यालय (नई दिल्ली) में अपना जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा दिया और पत्रकार बनकर कार्य शुरु किया । मेरे द्वारा पत्रकारिता का या मास कम्युनिकेशन में कोई डिग्री या डिप्लोमा नही लिया गया है । ए टैक कम्पनी में कार्य करने के दौरान लोग मुझे इंजीनियर साहब कहने लगे थे । इसलिये मैने अपने नाम के आगे इंजीनियर विनोद कुमार गौतम लगा लिया । मेरे पास इंजीनियरिंग की भी कोई डिग्री नही है । इस काम से मैने कई लोगों को अपनी एजेंसी का परिचय पत्र जारी करके पत्रकार बना दिया था । जो समय-समय पर मुझे पैसे देते थे । जिससे मेरा खर्चा चलता है । मैने इन लोगों को बचाने के लिये सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफार्म पर लगातार फर्जी खबरें/ट्वीट बिना किसी तथ्यात्मक आधार पर प्रकाशित की थीं । ताकि पुलिस डर जाये और इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही न करे और इन खबरों को एक्स प्लेटफार्म से ट्वीट को हटवाने के लिये पुलिस मुझे पैसे आदि दे दे ।


