बरेली

बुलडोजर का वार, फूट रहा अपनों का गुबार, माननीयों की चुप्पी पर भी भड़के लोग

150 दुकानों पर लगाए गए निशान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। सीएम ग्रिड योजना के नाम पर कोहाड़ापीर-नैनीताल रोड पर शुरू हुई निगम की घेराबंदी ने सियासी रूप लेना शुरू कर दिया है। भाजपाई ही खफा नजर आने लगे हैं। कार्रवाई की जद में आए पक्के भवनों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। सात दिन की मोहलत देकर निगम ने साफ कर दिया है कि खुद हथौड़ा चलाओ, वरना बुलडोजर चलेगा और उसका किराया भी तुम्हारी जेब से ही वसूला जाएगा। निगम प्रशासन की इस कार्यशैली ने व्यापारियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे तीखा प्रहार भाजपा के भीतर से ही हो रहा है। भाजपा के कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह विकास नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में चूर अधिकारियों की तानाशाही है। कुदेशिया फाटक पर जीआरएम स्कूल के सामने कारोबार करने वाले सुरेश ने कहा कि जिन लोगों ने पार्टी को खून-पसीने से सींचा, निगम के अफसर उन्हीं के वैध मकानों पर बिना नक्शा देखे बुलडोजर चलाने की धमकी दे रहे हैं। चेतावनी दी अगर माननीयों ने चुप्पी नहीं तोड़ी, तो कार्यकर्ताओं का यह गुस्सा वोट की चोट बन सकता है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारी अनिल अग्रवाल और भाजपा व आरएसएस से जुड़े सुमित गुप्ता ने भी निगम की मंशा पर सवाल उठाए। अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि निगम के पास कोई स्पष्ट सीमांकन नहीं है और अधिकारी सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिए बिना किसी तकनीकी जांच के लाल निशान लगा रहे हैं। कान्फेक्शनरी की दुकान चलाने वाली गीता ने कहा कि हमारे पास बीडीए से स्वीकृत नक्शे हैं, बीडीए से उन्होंने संपत्ति खरीदी थी, लेकिन अफसर सुनने को राजी नहीं। अफसरों कार्यशैली से नाराज लोगों का कहना है कि जिन कार्यकर्ताओं के कंधों पर सरकार टिकी है, वही माननीयों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां से सिर्फ आश्वासन की घुट्टी मिल रही है। फिलहाल, कोहाड़ापीर के बाजार में दहशत और आक्रोश का माहौल है। एक तरफ निगम अपनी कार्रवाई पर अड़ा है, तो दूसरी तरफ भाजपा और अन्य संगठनों से जुड़े लोग आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं।
कोहाड़ापीर से कुदेशिया फाटक तक शुक्रवार को अतिक्रमण चिह्नित करने पहुंची नगर निगम ने 150 से अधिक दुकानों समेत अन्य भवनों पर निशान लगाए। एक फीट से लेकर दस फीट तक दायरा नगर निगम के अनुसार अतिक्रमण की जद में आ रहा है। इन दुकानदारों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इस रोड के तमाम दुकानदारों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि नक्शा समेत कई ऐसे दस्तावेज हैं कि उन्होंने मानक के अनुसार निर्माण कराया है। निगम के नक्शे-मानचित्र पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि अन्यायपूर्ण तरीके से की जाने वाली इस कार्रवाई से वह रोड पर आ जाएंगे। इधर, निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 1920-1921 के पुराने नक्शे के आधार पर ही निशान लगाए जा रहे हैं। इसी आधार पर कई जगह दो फीट से लेकर 11 फीट तक अतिक्रमण सामने आया है।
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