गाजियाबाद

धरने से घिरे एसडीएम, सवालों से बचते हुए पीछे के रास्ते से हुए रफूचक्कर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। लोनी तहसील का उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय आज प्रशासनिक गरिमा का नहीं, बल्कि अहंकार, टकराव और जवाबदेही से पलायन का प्रतीक बनकर रह गया। अधिवक्ताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार के विरोध में भड़के वकीलों ने जब अपना मोर्चा खोला, तो पूरा तहसील परिसर नारों और आक्रोश से गूंज उठा।
सुबह करीब 11 बजे से दर्जनों अधिवक्ता एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर डटे रहे, न्याय, सम्मान और जवाबदेही की मांग करते हुए। वकीलों का कहना है कि उपजिलाधिकारी दीपक सिधनवाल से मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन पूरे दिन प्रशासन की ओर से संवाद की कोई गंभीर पहल नहीं की गई, जिससे आक्रोश और गहराता चला गया।
धरना बढ़ता रहा, नारे तेज होते रहे और अधिवक्ता एसडीएम से सीधे जवाब की मांग करते रहे। लेकिन शाम होते-होते हालात उस बिंदु पर पहुंच गए, जिसने प्रशासनिक कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
करीब शाम 6:30 बजे, जब धरना समाप्त होने का कोई संकेत नहीं था, तब एसडीएम महोदय सामने आकर स्थिति स्पष्ट करने की बजाय कार्यालय के पीछे के रास्ते से चुपचाप निकलते हुए देखे गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, मानो सवालों से बचना ही उपजिलाधिकारी का प्राथमिक उद्देश्य हो।
धरना दे रहे अधिवक्ताओं में इसको लेकर और भी आक्रोश फैल गया। वकीलों का कहना है
जब सवालों का सामना करने का समय आया, तो उपजिलाधिकारी अधिकारी रास्ता बदलकर निकल गए। यह जनता और अधिवक्ताओं—दोनों के सम्मान का अपमान है।
बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि जिन पर कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही अधिकारी सवालों से भागते नजर आए। वकीलों के अनुसार यह व्यवहार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा प्रहार है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि
क्या अब अधिकारी संवाद की जगह दरवाज़े बदलकर निकलने को ही समाधान मानने लगे हैं?

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जे पी शर्मा ने दो टूक कहा है कि जब तक एसडीएम सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और अधिवक्ताओं के लिए  नव निर्मित तहसील में बैठने की उचित व्यवस%8

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