असम में महान गायक जूबिन गर्ग की मौत पर आक्रोश उफान पर।
आंसू बोले – "जूबिन गर्ग एक ज्वालामुखी हैं, उनके नाम पर राजनीति करने वाले जलकर राख हो जाएंगे"

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के महान गायक और “असमिया आत्मा” के प्रतीक जूबिन गर्ग की संदिग्ध मृत्यु को लेकर पूरे राज्य में आज भी ग़ुस्सा और शोक का माहौल बरक़रार है। उनकी मौत के न्याय की मांग में आज सदौ असम छात्र संघ (AASU) ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन, श्रद्धांजलि सभा और शांतिपूर्ण रैली आयोजित की। गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, जोरहाट, नगाँव, शिवसागर, बोंगाईगाँव और बरपेटा सहित कई शहरों में हजारों छात्र, कलाकार, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और आम लोग हाथों में मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरे। आसू के अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा, “जूबिन गर्ग एक ज्वालामुखी हैं, जो भी उनके नाम पर राजनीति करने की कोशिश करेगा, वह इसी आग में जल जाएगा। असम के लोग अपने प्रिय कलाकार को लेकर कोई भी राजनीतिक खेल कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।” संगठन ने स्पष्ट किया कि “जूबिन गर्ग सिर्फ गायक नहीं थे, वे असम की आत्मा थे। उनकी मृत्यु संदेहास्पद है, और जब तक सच्चाई पूरी तरह सामने नहीं आती, आंदोलन जारी रहेगा।” प्रशासन की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया कि जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है और सरकार न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन AASU ने सरकार और जांच एजेंसियों से मांग की कि हर कदम पारदर्शिता के साथ जनता के सामने लाया जाए। राज्य के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आज का दिन “जूबिन न्याय दिवस” के रूप में मनाया गया। कई जगहों पर श्रद्धांजलि सभाएँ, कविता पाठ और संगीत संध्याएँ आयोजित हुईं। युवाओं ने शपथ ली – “जूबिन की धुन नहीं थमेगी, न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।” कलाकारों ने मोमबत्तियाँ जलाकर जूबिन के गीतों की लय में न्याय की मांग दोहराई –”यह धरती, यह नदी, यह पहाड़ – सबमें जूबिन की आत्मा गूँजती रहेगी। न्याय के लिए असम एकजुट रहेगा।” असम आज एक सुर में बोल उठा – “जूबिन गर्ग पर राजनीति नहीं, न्याय और गरिमा की प्राप्ति ही असम की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”



