गाजियाबाद
लोनी में प्लॉटों पर अवैध कब्ज़े का आरोप, प्रशासन पर निष्क्रियता के सवाल — आंदोलन की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी/गाज़ियाबाद। लोनी क्षेत्र में कथित भूमाफिया गतिविधियों को लेकर विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों द्वारा खरीदे गए प्लॉटों व मकानों पर अवैध कब्ज़े के आरोपों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पीड़ित परिवार लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया जा रहा है।
राष्ट्रवादी सवर्ण महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सतीश शर्मा ने लोनी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सब्लूगढ़ी गांव और आसपास के क्षेत्रों में भूमाफियाओं द्वारा सुनियोजित तरीके से गरीबों की ज़मीनों पर कब्ज़ा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं, जिसके कारण दर्जनों परिवार न्याय के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
खसरा संख्या 165 व 166 से जुड़े विवाद
राष्ट्रवादी सवर्ण महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश शर्मा, ठाकुर मनीष सिंह, संजीव शर्मा
और अजय कुमार चौरसिया ने बताया कि सब्लूगढ़ी गांव में लगभग पाँच दर्जन परिवारों के प्लॉटों पर बनी चारदीवारी और मकानों को तोड़कर भूमाफियाओं द्वारा अवैध रुप से कब्ज़ा किया गया।
उनके अनुसार, अजय कुमार चौरसिया ने वर्ष 2008 में खसरा संख्या 165 में करीब चार बीघा भूमि खरीदी थी। वर्ष 2008 से 2013 के बीच रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और कब्ज़े की पूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, इसके बावजूद अब अचानक विवाद खड़ा कर कब्ज़े की कोशिश की जा रही है।
इसी तरह खसरा संख्या 166 में बसे 25 से अधिक परिवारों का रास्ता दबंगई के बल पर बंद कर देने का आरोप भी लगाया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में थाना लोनी, उपजिलाधिकारी लोनी, एसीपी लोनी सहित प्रदेश स्तरीय अधिकारियों तक शिकायतें भेजी गईं, किंतु अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
“जीरो टॉलरेंस नीति कागज़ों में ही सीमित”
पीड़ित परिवारों ने कहा कि अवैध कब्ज़ों पर कार्रवाई न होना राज्य सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के विपरीत है। उनका कहना है कि वर्षों की जमा-पूँजी से खरीदे गए प्लॉटों पर कब्ज़े का खतरा बना हुआ है और गरीबों के सिर से छत छिनने का डर है।
सतीश शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं की गई और पीड़ितों को उनका वैध अधिकार नहीं दिलाया गया, तो लोनी से लेकर लखनऊ तक आंदोलन किया जाएगा।
प्रशासनिक पक्ष की प्रतीक्षा
इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। समाचार लिखे जाने तक उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पीड़ितों ने उम्मीद जताई है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।



