
नई दिल्ली : भारत के अमेरिका साथ व्यापार समझौते के मामले में चीन और पाकिस्तान से आगे निकल गया है। भारतीय सामानों पर टैरिफ घटकर 18% हो गया है, इस फायदे के लिए हमें थोड़ी कीमत भी चुकानी पड़ेगी वह कीमत है रूस से तेल खरीदारी से जुड़ी शर्त। जानें बाजार और इकोनॉमी पर भारत-अमेरिका समझौते का असर।
वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत ने अपने एशियाई प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए एक बड़ी रणनीतिक जीत हासिल की है। सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है। साथ ही, यह भी कहा है कि यदि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया तो इस वजह से लगा 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ भी नहीं लगाया जाएगा। इस फैसले ने भारतीय निर्यातकों को चीन, वियतनाम और पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुकाबले उत्पादों की कीमत के मामले में सीधे तौर पर लाभ दे दिया है।
हालांकि, इस डील के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे इस सौदे के बदले बदले भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है, जिसमें रूसी तेल की खरीद बंद करना शामिल है। चीन और पड़ोसियों पर भारत की निर्णायक बढ़त इस नए टैरिफ स्ट्रक्चर ने दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के निर्यात बाजार का समीकरण बदल दिया है। अब तक टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग में बांग्लादेश और वियतनाम भारत को कड़ी टक्कर दे रहे थे, लेकिन अब अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ता होगा।
भारत और पड़ोसियों पर अमेरिकी टैरिफ
* भारत: 18% (नया टैरिफ)
* इंडोनेशिया: 19%
* पाकिस्तान: 19%
* बांग्लादेश: 20%
* वियतनाम: 20%
* चीन: 34%
चीन के खिलाफ 34% के मुकाबले भारत पर केवल 18% का शुल्क लगना यह सुनिश्चित करता है कि अमेरिकी कंपनियां सप्लाई चेन के लिए अब बीजिंग के बजाय नई दिल्ली को प्राथमिकता देंगी।
क्या है ‘डील’ की कीमत? -रूसी तेल पर पेंच भले ही यह समझौता भारतीय निर्यात के लिए संजीवनी है, लेकिन इसके साथ जुड़ी शर्तें भारत की विदेश नीति की अग्निपरीक्षा ले सकती हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पीएम मोदी ने ‘रूसी तेल खरीदना बंद करने’ और अमेरिका से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि करते हुए साफ किया कि शर्त केवल तेल खरीद कम करने की नहीं, बल्कि ‘पूरी तरह रोकने’ की है। ट्रंप का तर्क है कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी।
समझौते का बाजार पर क्या असर हुआ?-इस समझौते की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक तेजी देखी गई। सेंसेक्स 3,500 अंक उछला और निफ्टी में लगभग 5% की तेजी आई। इस एक खबर ने निवेशकों की संपत्ति में 13 लाख करोड़ रुपये का इजाफा कर दिया। बाजार इसे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर के लिए स्वर्णिम अवसर मान रहा है।
ट्रंप भारत से क्या उम्मीद कर रहे?
यह समझौता एकतरफा नहीं है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि भारत भी अमेरिकी सामानों पर अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को घटाकर ‘शून्य’ करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसे पारस्परिक सहयोग के सिद्धांत के तहत लागू किया गया है।
भारत और अमेरिका के बीच हुआ व्यापारिक समझौता हमारे देश की अर्थव्यवस्था, विशेषकर कपड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामानों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ है। चीन और वियतनाम के मुकाबले टैरिफ में 2% से 16% तक का अंतर भारत को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने में मदद करेगा। हालांकि, रूसी तेल की सस्ती आपूर्ति को छोड़कर अमेरिकी तेल की ओर शिफ्ट होना भारत के आयात बिल और महंगाई पर क्या असर डालेगा, यह आने वाले महीनों में देखने वाली बात होगी।



