नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। चलती ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है। गाड़ी संख्या 12622 तमिलनाडु एक्सप्रेस में दिल्ली से चेन्नई जा रही 23 वर्षीय छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना सामने आने के बाद रेलवे में वेंडर सत्यापन और ऑनबोर्ड निगरानी की प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या हुआ था ट्रेन के भीतर
चेन्नई निवासी छात्रा के अनुसार वह 24 दिसंबर को नई दिल्ली से चेन्नई के लिए रवाना हुई थी। पीडि़ता ने जीआरपी को दी तहरीर में बताया कि 25 दिसंबर की सुबह करीब 03.30 से 05.30 बजे के बीच, जब ट्रेन झांसी स्टेशन पार कर आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान यह घटना हुई। छात्रा का आरोप है कि वह अपनी सीट पर सो रही थी, तभी चाय बेचने वाले की आईआरसीटीसी की नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति ने गलत नियत से उसे छुआ। कुछ ही देर बाद एक अन्य वेंडर ने भी उसके साथ अश्लील हरकत की। विरोध करने पर दोनों आरोपी मौके से भाग निकले।
देर से दर्ज हुई एफआईआर, बढ़े सवाल
घटना 25 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है, जबकि जीआरपी ललितपुर में मुकदमा 26 फरवरी 2026 को दर्ज हुआ। इस लगभग दो महीने की देरी ने शिकायत प्रक्रिया और पुलिस प्रतिक्रिया की खुलासा खामियों को उजागर किया है। जीआरपी ने बीएनएस 2023 की धारा 75 के तहत एफआईआर संख्या 0019 दर्ज कर जांच उपनिरीक्षक राजेश सिंह को सौंपी है। पीडि़ता ने आरोपियों की पहचान करने की बात कही है।
सिस्टम पर उठे अहम सवाल
इस घटना ने रेलवे की यात्री सुरक्षा व्यवस्था के कई पहलुओं को चर्चा में ला दिया है, जिनमें ट्रेन में सेवा देने वाले कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन और पहचान प्रक्रिया कितनी प्रभावी है? लंबी अवधि तक आरोपियों का सक्रिय रहना ऑनबोर्ड सुरक्षा निगरानी पर प्रश्न उठाता है। घटना और एफआईआर के बीच लंबा अंतर पीडि़त सहायता तंत्र की गति पर सवाल खड़ा करता है।
रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि यात्री सुरक्षा ढांचे की कमजोरी का संकेत है। यदि अधिकृत वर्दी में मौजूद कर्मियों पर ही संदेह हो, तो यात्रियों का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है। अब नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां आरोपियों तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं और रेलवे प्रशासन वेंडर स्क्रीनिंग तथा ट्रेन सुरक्षा प्रोटोकॉल में क्या ठोस सुधार करता है।
अपील
यदि किसी यात्री के साथ ट्रेन में ऐसी कोई घटना हो, तो तत्काल हेल्पलाइन 139 या रेलवे सुरक्षा हेल्पलाइन 182 पर शिकायत दर्ज कराना सबसे प्रभावी पहला कदम माना जाता है।