गाजियाबाद
लोनी की राजनीति में “मौन व्रत” का मौसम
नेता जी व्हाट्सएप पर व्यस्त और जनता पानी में त्रस्त

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी की जनता इन दिनों समस्याओं की दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ बारिश ने सड़कों को तालाब बना दिया है, दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के पदाधिकारी ऐसे गायब हैं मानो जनता की समस्याओं से उनका कोई लेना-देना ही न हो। बसपा, कांग्रेस, सपा, राष्ट्रीय लोकदल और अन्य दलों के पास पदाधिकारियों की लंबी-चौड़ी फौज जरूर है, लेकिन जनसमस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने वाला एक भी “योद्धा” फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा।
हालात ऐसे हैं कि लोनी की जनता पूछ रही है,
नेता जी आखिर कहां गए ? चुनावी मौसम खत्म होने के साथ ही क्या सभी पदाधिकारी ‘राजनीतिक दल शीतनिद्रा’ में चले गए?”
चुनाव आते ही कार्यकर्ता सक्रिय,जन समस्याओं पर सब निष्क्रिय
लोनी में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए हर दल के पास दर्जनों दावेदार और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद हैं। टिकट की चर्चा शुरू होते ही नेताओं के पोस्टर, बधाई संदेश और जनसेवा के दावे चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक छा जाते हैं।
लेकिन जैसे ही बात सड़क, बिजली ,जलभराव, जाम और सीवर की आती है, वैसे ही नेताओं के मोबाइल का नेटवर्क और आवाज दोनों गायब हो जाते हैं।
आश्चर्य की बात तो यह है कि जो नेता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे की “राजनीतिक खिंचाई” करने में सबसे आगे रहते हैं, वही जनता की समस्याओं पर व्हाट्सएप ग्रुप में दो लाइन लिखने का भी साहस भी नहीं जुटा पा रहे।
शिव विहार मेट्रो स्टेशन बना “मिनी झील”
बारिश के बाद शिव विहार मेट्रो स्टेशन के पास ऐसा जलभराव हुआ कि राहगीरों को समझ ही नहीं आ रहा कि सड़क कहां खत्म हो रही है और तालाब कहां शुरू हो रहा है।
घंटों जाम में फंसे लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। वाहन चालक भगवान का नाम लेकर पानी में गाड़ी उतार रहे हैं, जबकि पैदल चलने वाले लोग सड़क पार करने से पहले गहराई नापते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी नेता की गाड़ी इस रास्ते से रोज गुजरती, तो शायद आधी रात में भी पंप लगाकर पानी निकलवा दिया जाता।
सीवर कार्य ने बढ़ाई मुसीबत
दूसरी ओर लोनी थाने से पुस्ता चौकी तक सड़क के बीचों-बीच सीवर डालने का कार्य चल रहा है। नतीजा यह है कि एक तरफ का रास्ता बंद पड़ा है और दूसरी ओर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक किसी “राजनीतिक गठबंधन” की तरह जबरन चलाया जा रहा है।
ऊपर से सड़क पर भरा पानी दोपहिया वाहन चालकों के लिए किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स से कम नहीं है। लोग गिरते-पड़ते अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
लेकिन हैरानी इस बात की है कि इतनी बड़ी समस्या पर किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक कोई बड़ा आंदोलन, प्रदर्शन या ज्ञापन तक देना जरूरी नहीं समझा।
उद्घाटन पहले, काम बाद में और कभी-कभी तो बहुत बाद में
लोनी में विकास कार्यों का हाल भी बड़ा दिलचस्प है। यहां पहले फीता कटता है, फोटो खिंचती है, मिठाई बांटी जाती है और फिर काम शुरू होने का इंतजार वर्षों तक चलता रहता है।
जनता अब मजाक में कहने लगी है,
“लोनी में विकास कार्य नहीं, सिर्फ उद्घाटन विकसित हो रहे हैं।”
जनता बोली “नेता जी, कम से कम पानी में उतरकर फोटो ही खिंचवा लो”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समस्याओं का समाधान नहीं करा सकते तो कम से कम जनता के बीच आकर हालचाल ही पूछ लें।
क्योंकि अभी तक तो स्थिति यह है कि जनता पानी में फंसी है और नेता जी सोशल मीडिया पर शब्दों की नाव चलाने में व्यस्त हैं।
लोनी की जनता अब इंतजार कर रही है उस दिन का, जब कोई राजनीतिक दल व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से निकलकर सड़कों पर भी दिखाई देगा।

