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खालिस्तानी दबाव पर भारी पड़ा भारत का दम

कनाडाई मंत्री बोले- भारत बनने वाला है तीसरी सबसे बड़ी ताकत

नई दिल्ली : दोनों देशों ने भारत और कनाडा के बीच संपर्क को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की है, जिसमें लोगों के बीच संबंध, व्यापारिक गतिशीलता और प्रत्यक्ष वाणिज्यिक संपर्क शामिल हैं, जो विस्तारित व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक कारक हैं।
भारत और कनाडा ने एक व्यापार और निवेश मंच का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के व्यवसायों को एक साथ लाना, नई वाणिज्यिक साझेदारियों को बढ़ावा देना और व्यापारिक जुड़ाव बढ़ाना है। बयान में कहा गया है कि दोनों देशों ने भारत और कनाडा के बीच संपर्क को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की है, जिसमें लोगों के बीच संबंध, व्यापारिक गतिशीलता और प्रत्यक्ष वाणिज्यिक संपर्क शामिल हैं, जो विस्तारित व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक कारक हैं। यह बयान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की तीन दिवसीय (25-27 मई) आधिकारिक यात्रा के समापन के बाद जारी किया गया। उन्होंने व्यापारिक नेताओं के साथ कई बैठकें कीं और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इसमें कहा गया है, मंत्रियों ने कनाडा-भारत व्यापार और निवेश मंच का शुभारंभ एक प्रमुख मंच के रूप में किया है जो कनाडाई और भारतीय व्यापारिक नेताओं को एक साथ लाता है और नई वाणिज्यिक साझेदारियों और व्यापारिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है।
ÑÑकनाडाई मीडिया द्वारा खालिस्तान मुद्दे को दोबारा हवा देने की कोशिशों के बीच मनिंदर सिद्धू ने यह बात कही है। दरअसल, कनाडा इस साल के आखिर तक भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को हर हाल में फाइनल करने की कवायद में जुटा है। 2023 में निज्जर हत्याकांड के बाद भारत-कनाडा संबंधों में जो ऐतिहासिक गिरावट आई थी, उसने व्यापारिक वातार्ओं पर भी ब्रेक लगा दिया था। लेकिन अब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा एक बार फिर भारत के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को पटरी पर लाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
आर्थिक संबंधों का ‘रीसेट’ मोड आॅन-प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने खुद भारत का दौरा कर कनाडाई सरकार की ओर से यह साफ किया है कि वे खालिस्तान मुद्दे पर भारत की चिंताओं को पूरी तरह समझते हैं। इसका सीधा असर कनाडा की ताजा इंटेलिजेंस रिपोर्ट में भी देखने को मिला है, जहाँ पहली बार खालिस्तान समर्थकों को देश के लिए एक बड़ा खतरा माना गया है। मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद, कनाडाई सरकार ने भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को ‘रीसेट’ करने का बड़ा फैसला लिया। इसी कड़ी में आज दोनों देशों ने मिलकर साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसकी शुरूआत के लिए एक विशेष ‘ट्रेड फोरम’ भी लॉन्च किया गया है।

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