कैराना

बार एसोसिएशन में महिला नामांकन पर विवाद

अधिवक्ता शालिनी कौशिक के विरोध पर बीसीआई चेयरमैन ने लिया संज्ञान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
कैराना। बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में महिला अधिवक्ताओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विवाद गहराने लगा है। कैराना बार एसोसिएशन की सदस्य एवं पूर्व कनिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता शालिनी कौशिक ने इस आदेश का विरोध करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से हस्तक्षेप की मांग की है। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के जिला जजों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में महिला अधिवक्ताओं को नामित करने का अधिकार दिया है, ताकि 30 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। आदेश के सार्वजनिक होते ही इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अधिवक्ता शालिनी कौशिक ने व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से बीसीआई चेयरमैन को भेजी आपत्ति में कहा कि यह निर्णय बार एसोसिएशन की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करता है। उनका कहना है कि बार में पदाधिकारी हमेशा चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं और किसी प्रकार का नामांकन या आरक्षण लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला अधिवक्ताओं को चुनाव लड़ने से कभी नहीं रोका गया और वे स्वयं भी वर्ष 2018 में निर्विरोध तथा 2020 में चुनाव जीतकर कनिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने आशंका जताई कि जिला जज द्वारा नामित सदस्य अधिवक्ताओं के बजाय ‘बेंच’ के प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे बार और बेंच के बीच संतुलन प्रभावित होगा और अधिवक्ताओं की एकजुटता पर असर पड़ेगा। मामले में बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने संज्ञान लेते हुए अधिवक्ता को व्हाट्सएप के माध्यम से अवगत कराया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस आदेश का विरोध करने जा रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी आधिकारिक रूप से अपलोड नहीं हुआ है, जिसके बाद विस्तृत अध्ययन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिवक्ता शालिनी कौशिक ने इस मुद्दे पर अधिवक्ता समुदाय से एकजुट होकर विरोध करने की अपील की है।
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