गाजियाबाद
लोनी में बिजली विभाग की लापरवाही बनी बंदरों की मौत का कारण
दो महीने में पांचवीं घटना से लोगों में आक्रोश

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी दो नंबर बस स्टैंड स्थित जूता फैक्ट्री के पास बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही के चलते लगातार बंदर करंट की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। बीते दो महीनों में इस क्षेत्र में विद्युत करंट से बंदरों की मौत की यह पांचवीं घटना बताई जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों और गौ-रक्षा संगठनों में भारी रोष व्याप्त है।
घटना ने न केवल वन्य जीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह इंसानियत और मानवीय संवेदनाओं की भी परीक्षा बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई स्थानों पर खुले और लटके हुए बिजली के तार, असुरक्षित ट्रांसफार्मर तथा जर्जर विद्युत उपकरण लंबे समय से हादसों को न्योता दे रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
घटना की सूचना मिलने पर लक्ष्मी गौ रक्षा ट्रस्ट के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और मृत बंदरों का धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया। इस दौरान इन्दापुरी चौकी प्रभारी दिग्विजय सिंह भी मौके पर मौजूद रहे। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे केवल पशु संरक्षण का नहीं बल्कि धार्मिक और मानवीय मूल्यों से जुड़ा विषय बताया।
गौ-रक्षक आशू पहलवान ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खुले और लटके तारों को तत्काल ठीक कराया जाए, ट्रांसफार्मरों और बिजली के पोलों पर बंदर-रोधी सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं तथा जिन क्षेत्रों में असुरक्षित बिजली व्यवस्था है वहां तैनात जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जहां एक ओर धार्मिक आस्था, जीव-दया और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खुले बिजली तारों के कारण बेजुबान जानवरों की लगातार हो रही मौतें प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर कर रही हैं। हिंदू धर्म में बंदरों को भगवान हनुमान का स्वरूप माना जाता है, ऐसे में उनकी इस तरह दर्दनाक मौत लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर रही है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सभी खतरनाक बिजली उपकरणों की जांच की जाए ताकि भविष्य में किसी भी पशु या इंसान की जान जोखिम में न पड़े।


