गोड्डा

क्या पता था दर्द ही बन जाएगी दिल की दवा, क्या खबर थी जहर अमृत का मजा दे जाएगा

 कवयित्री अंकिता सिन्हा के काव्य से समां बांधा, खूब बजी तालियां 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गोड्डा पुस्तक मेले में सजी कविताओं की महफिल, श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
गोड्डा। समय इंडिया ट्रस्ट, नई दिल्ली, पुस्तक मेला समिति व प्रज्ञा रिसर्च एसोसिएशन (प्राण), रांची के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय पुस्तक मेले के दौरान स्थानीय नगर भवन में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन में कवियों और कवियत्रियों ने ओजपूर्ण, भावपूर्ण व सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं का पाठ किया। काव्य प्रेमी श्रोताओं ने रचनाओं को भरपूर सराहा और ऐसे रचनात्मक आयोजन के लिए संस्था को बधाई दी।
खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय कवयित्री व जमशेदपुर निवासी अंकिता सिन्हा ने देशभक्ति, प्रेम, प्रकृति, सामाजिक विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं एवं समकालीन विषयों पर आधारित रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। उनकी इस पंक्ति पर देर तक तालियां बजती रही..क्या पता था दर्द ही बन जाएगा दिल की दवा..,क्या खबर थी जहर अमृत का मजा दे जाएगा। इसके अलावा डा. ब्रह्मदेव कुमार, सुरजीत झा, प्रकाश कुमार यादव, शैलेन्द्र प्रसाद, शैलेन्द्र राम, मनीष सिंह, शिव कुमार भगत, प्रो. ओम प्रकाश मंडल, डॉ. मनोज कुमार राही, माधव चंद्र  चौधरी, डॉ. प्रदीप प्रभात, बिपुल दुबे, सोनी कुमार झा, शशि सिन्हा, चेतन आनंद और कवियत्रियों में विनीता प्रियदर्शनी, ऋतंभरा मीठी, डा. स्मिता क्षिप्रा, अर्पणा कुमारी, फूल कुमारी, अनामिका मिश्रा अन्य कवि कवियत्रियों की कविताओं को भी श्रोताओं ने न केवल सुना बल्कि भरपूर सराहा। इन कवियों की रचनाओं में जीवन एवं समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों की भावात्मक प्रस्तुति से श्रोताओं ने अपने को जुड़ा महसूस किया। कविताओं में प्रेम, प्रकृति, हास्य एवं व्यंग्य की शोखी एवं तल्खी महसूस की गई। इससे पहले आयोजन समिति एवं समय इंडिया ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण द्वारा मंचासीन कवियों साहित्यकारों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। पुस्तक प्रेमियों के लिए पुस्तक मेले में आने और अपनी पसंद की पुस्तकें चुनने का सुनहरा अवसर रहेगा। इसके बाद पुस्तक मेला सिमटकर अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना होगा। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने पुस्तक प्रेमियों से अपील की है कि यदि आप अभी तक जीवन की आपाधापी में उलझे होने के कारण किताबों के करीब नहीं पहुंच पाएं हैं तो अपनी व्यस्त जिन्दगी से थोड़ा समय निकालकर अपने करीब सजी किताबों की खूबसूरत दुनिया से जरूर रूबरू हो लें। ऐसा अवसर न जाने कब उपलब्ध होगा। पुस्तक मेले में बच्चों का साहित्य, प्रतियोगिता संबंधी पुस्तकों के अतिरिक्त जीवन एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी पुस्तकें न केवल चर्चा में है। बल्कि पुस्तक प्रेम उन्हें चुन और खरीद रहे हैं। इन पुस्तकों में बंगला के सुप्रसिद्ध कथाकार बंकिम चटर्जी का आनंदमठ, नागार्जुन की रचनावली, वरिष्ठ कथाकार और पत्रकार चंद्र भूषण की पुस्तक झारखंड पर्यटन, झारखंड के 28 क्रांतिकारियों पर केन्द्रित चार खंडों में समय प्रकाशन समूह से प्रकाशित झारखंड के क्रांतिकारी पुस्तक विष्णु प्रभाकर द्वारा शरतचंद के जीवन पर केन्द्रित आत्मकथा आवारा मसीहा, भीष्म साहनी का तमस पुस्तक प्रमुख हैं।
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