नगर निगम सिंगरौली में उपयंत्री पर गंभीर आरोप, कार्रवाई पर टिकी निगाहें

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। नगर निगम सिंगरौली एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला नगर निगम के उपयंत्री संजीव अहिरवार से जुड़ा है, जिन पर कार्यप्रणाली और आचरण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उपयंत्री ने कार्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में वास्तविक तिथि से पहले ही 13 जुलाई से 20 जुलाई तक के हस्ताक्षर कर दिए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन द्वारा उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई गई है तो केवल नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित क्यों है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
इसी बीच उपयंत्री संजीव अहिरवार पर एक और गंभीर आरोप चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 10 हजार रुपये लेने की शिकायत नगर निगम तक पहुंची है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि गरीब हितग्राहियों के अधिकारों से भी जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।नगर निगम में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि एक ओर आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि अधिकारियों पर लाभ दिलाने के नाम पर पैसे लेने जैसे आरोप लगते हैं तो इससे पूरी व्यवस्था की साख प्रभावित होती है।
शहर के सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी करने से जनता का विश्वास बहाल नहीं होगा। यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध निलंबन सहित विभागीय और कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है।
वर्तमान में सभी की निगाहें नगर निगम प्रशासन और आयुक्त कार्यालय पर टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि जारी नोटिस का जवाब मिलने के बाद प्रशासन क्या निर्णय लेता है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाती है या मामला केवल फाइलों तक सीमित रह जाता है।




