मथुरा
वृंदावन यमुना रिवर फ्रंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
177 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा काम रोका

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। वृंदावन में यमुना नदी पर बन रहे रिवर फ्रंट के काम पर फिर रोक लग गई है। यमुना में काफी अंदर तक जाकर बनाए जा रहे रिवर फ्रंट के कारण पानी का प्रवाह भी रुक रहा था और यमुना का स्वरूप भी बिगड़ रहा था। ऐसे में ब्रज वृंदावन देवालय समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को काम पर रोक लगा दी है। केंद्र और राज्य सरकार से छह सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है। पूर्व में भी करीब दस वर्ष तक यह परियोजना अटकी रही। वृंदावन में यमुना नदी पर 177 करोड़ रुपये की लागत से रिवर फ्रंट का निर्माण किया जा रहा है। करीब दस वर्ष पहले बनी परियोजना की हाई कोर्ट में शिकायत की गई और इसे रोकने की मांग की। दस वर्ष तक काम रुका रहा। हाई कोर्ट के आदेश पर इसी वर्ष अप्रैल में काम शुरू किया गया। रिवर फ्रंट के तहत आठ घाटों का विकास किया जाएगा, जिसमें बांकेबिहारी मंदिर के पास के घाट भी शामिल हैं। इस परियोजना के तहत घाटों का सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था, और पर्यटकों के बैठने के लिए बेंच लगाई जाएंगी। इसके अलावा, नालों की टेपिंग का काम भी पूरा किया जा चुका है, जिससे यमुना नदी में प्रदूषित जल का प्रवाह रोका जा सकेगा। वर्तमान में यहां नवनिर्मित प्लेटफार्म और सीढ़ियों पर लाल पत्थर लगाए जाने का काम चल रहा है। इस मामले को लेकर ब्रज वृंदावन देवालय समिति सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। समिति का आरोप है कि रिवर फ्रंट यमुना में काफी आगे तक बनाया जा रहा है। इससे यमुना का स्वरूप तो बिगड़ ही रहा है, पानी का प्रवाह भी कम होगा और उसका भी स्वरूप बदलेगा। इससे वृंदावन की पहचान भी प्रभावित होगी। समित के अधिवक्ता शुभम उपाध्याय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने मंगलवार को समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिवर फ्रंट का काम रोकने का आदेश दिया। शुभम उपाध्याय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से छह सप्ताह में पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है।नवीन कुमार, अधिशासी अभियंता, आगरा कैनाल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। यह हमें जानकारी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट क्या आदेश दिया है इसकी जानकारी नहीं है। यदि रिपोर्ट मांगी गई है तो हम उसे दाखिल करेंगे।



