बरेली
भूजल में घुला जानलेवा नाइट्रेट, सतत योजना में वित्तीय मदद का अभाव
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में उठाए दो अहम मुद्दे

सरकार ने माना उर्वरक से भूजल दूषित, CBG प्लांट को नहीं मिल रही सीधी सहायता
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। बरेली आंवला क्षेत्र से लोकसभा सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में दो मुद्दे उठाए – कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से भूजल में नाइट्रेट प्रदूषण और सतत योजना के तहत CBG संयंत्रों को सीधी वित्तीय सहायता न मिलना।
पहला मुद्दा: भूजल में नाइट्रेट
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने माना कि अत्यधिक उर्वरक उपयोग से भूजल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। CGWB नियमित निगरानी कर नाइट्रेट प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर राज्यों से साझा कर रहा है। नाइट्रेट कम करने को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्राकृतिक खेती, बीपीकेपी, जल शक्ति अभियान, जल संचय जन भागीदारी और मिशन अमृत सरोवर चलाए जा रहे हैं। देशभर में 24,000 से अधिक डिजिटल उपकरणों से भूजल निगरानी नेटवर्क का विस्तार भी किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भूजल प्रबंधन राज्य सरकारों का विषय है, केंद्र सिर्फ तकनीकी सहयोग देता है।
दूसरा मुद्दा: CBG संयंत्र
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक देश में 217 CBG संयंत्र चालू हैं, जिनकी क्षमता 1,773 टन प्रतिदिन है। यूपी में 41 संयंत्र संचालित हैं। सतत योजना के तहत केंद्र कोई प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता नहीं देता। यह पूरी तरह उद्यमियों की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर आधारित है। तेल कंपनियां केवल गैस खरीद EOI जारी करती हैं। भूमि, कच्चे माल की उपलब्धता, वित्तीय कठिनाइयां, तकनीकी बाधाएं और पाइपलाइन कनेक्टिविटी के कारण कई परियोजनाएं अधूरी हैं। DPI योजना से पाइपलाइन कनेक्टिविटी दी जा रही है। सांसद ने कहा कि ग्रामीण रोजगार और पराली प्रबंधन के लिए वित्तीय मदद और प्रक्रिया सरल करना जरूरी है।



