
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
महगामा। जिले सहित महगामा-हनवारा क्षेत्र में लोक आस्था, प्रकृति पूजा और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक करमा पर्व की तैयारियां नहाय-खाय की परंपरा के साथ शुरू हो गईं। हनवारा थाना क्षेत्र के बिशनपुर, कोयला, बारदभाड़ा, हनवारा, नारायणी समेत आसपास के गांवों में सुबह से ही पर्व को लेकर उत्साह और भक्तिमय माहौल देखने को मिला। घर-आंगन में महिलाओं और बच्चियों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा की तैयारी शुरू कर दी। करमा पर्व को लेकर सबसे अधिक उत्साह नन्हीं बच्चियों और किशोरियों में दिखा। बच्चियों ने बांस की टोकरी में मिट्टी और बालू भरकर जौ सहित अन्य अनाज के बीज बोए और जावा डाला तैयार किया। इसके बाद समूह में बच्चियां एक स्थान पर एकत्र हुईं और जावा डाला को बीच में रखकर धूप-दीप के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान बच्चियों ने सामूहिक रूप से करमा-धरमा से जुड़े पारंपरिक लोकगीत गाए, जिससे गांवों का वातावरण उत्सवी हो उठा। जावा डाली की स्थापना और लोकगीत करमा पर्व की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल हैं।ग्रामीण मान्यता के अनुसार, करमा पर्व में बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। वहीं, यह पर्व प्रकृति, कृषि और ग्रामीण सामुदायिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा है। जावा के अंकुरण को अच्छी फसल और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
पर्व को लेकर गांवों में बड़े-बुजुर्ग बच्चों को करमा पूजा की परंपरा, लोकगीत और रीति-विधान की जानकारी दे रहे हैं। इससे नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति से जुड़ रही है और गांव-टोले में करमा गीतों की गूंज के साथ पर्व का उल्लास बढ़ता जा रहा है।



