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मंदिर से बड़ी मदिरा,,प्रशासन की प्राथमिकता पर सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
अलवर : शहर के हृदय स्थल होप सर्कस, जो धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है, वहां मंदिर के पास शराब की दुकान खोले जाने से शहरवासियों में आक्रोश है। यह वही स्थान है जहां महिलाएं, बच्चे और श्रद्धालु दिनभर आते-जाते हैं। वहीं अब मंदिर की पवित्रता के पास शराब की बिक्री शुरू कर दी गई है।
आबकारी विभाग की इस नई नीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन के लिए आस्था से ज्यादा महत्व मदिरा से मिलने वाले रेवेन्यू का है। जिस स्थान पर लोग श्रद्धा से सिर झुकाते हैं, अब उसी स्थान के सामने बोतलें उठाई जाएंगी।
यह निर्णय न केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान है, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर सीधा हमला है। सवाल उठता है कि क्या अलवर प्रशासन अब मंदिरों को भी शराब की दुकानों की छांव में लाना चाहता है क्या सरकार की नजर में मंदिर की गरिमा से बड़ा राजस्व है?
प्रशासन की यह नीति समाज को किस दिशा में ले जा रही है? क्या यही विकास है कि मंदिर और शराब एक साथ खड़े हों
यह मामला अलवर की जनता के लिए चेतावनी है कि अगर आज नहीं बोले तो कल हर धार्मिक स्थल के पास यही हालात हो सकते हैं। अब वक्त है सवाल पूछने का—क्या अलवर केवल शराब बेचने का केंद्र बन गया है
यह केवल दुकान नहीं, आस्था के नाम पर व्यापार है।
शहरवासी जानना चाहते हैं: मंदिर की छांव में मदिरा की छूट किसके आदेश पर मिली।


