प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ने आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार देखा है- अमृत पांडेय
Under the leadership of Prime Minister Narendra Modi, the country has seen the biggest economic reform since independence - Amrit Pandey

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष अमृत पांडेय एवं प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी ने भाजपा जिला कार्यालय में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया। इस प्रेस वार्ता में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुग्रहित प्रसाद साह और जिला महामंत्री रूपेश भगत उपस्थित हुए। प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार देखा है। जीएसटी ने उपभोक्ताओं को राहत, व्यापारियों को सरलता और अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है। पूर्व में केन्द्र की कांग्रेस सरकारों ने केवल वादे किए, लेकिन सुधार कभी लागू नहीं कर पाए। मोदी ने राज्यों को भरोसा दिया, घाटा होने पर क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया। नई जीएसटी सुधार में रोज़मर्रा की वस्तुएं, कपड़े, जूते, दवाइयां, बीमा, टू-व्हीलर से लेकर फ्रिज-टीवी तक सब सस्ते हुए हैं। मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर टैक्स शून्य कर दिया गया है। यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा।जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने ऐतिहासिक और व्यापक सुधार किया है, यह बदलाव देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और उसे पूरी तरह रूपांतरित करेगा। आजादी के बाद पहली बार देश के टैक्स ढांचे में इतना बड़ा परिवर्तन किया गया है। यह सुधार उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देगा और व्यवस्था में सरलीकरण लाएगा, जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा। इस बदलाव से हमारे देश के युवा-युवतियों, महिलाओं, किसानों, कृषि उत्पादन, एमएसएमई क्षेत्र, उपभोक्ताओं, दुकानदारों और उद्योग चलाने वाले उद्यमियों और हर वर्ग को बड़ा लाभ मिलेगा। यह वास्तव में एक बहुत बड़ा तोहफा है, जो 22 सितंबर को, नवरात्रि के पहले दिन, देशवासियों को मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश से वादा किया था कि अब भारत रुकेगा नहीं, झुकेगा नहीं बल्कि आगे बढ़कर बड़े कदम उठाएगा और आज भारत के पास कड़े कदम उठाने क्षमता आ चुकी है। यह क्षमता 2014 से पहले नहीं थी, जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी, उस समय देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर हालत में थी। सभी जानते हैं कि कांग्रेस के 10 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार तो खूब हुआ, लेकिन कोई ठोस और परिवर्तनकारी सुधार नहीं किए गए। कांग्रेस ने वादे बहुत किए गए, मगर कार्रवाई नहीं की। श्रद्धेय अटल जी ने एक राष्ट्र-एक कर की परिकल्पना की थी। उस समय देश में लगभग 30-35 तरह के टैक्स, ड्यूटी और लेवीस लागू थे। अटल जी चाहते थे कि इन सबको समेटकर एक टैक्स बने लेकिन 2004 में वे दोबारा चुनकर नहीं आए और इसके बाद यूपीए सरकार सिर्फ वादे करती रही। कांग्रेस के वित्त मंत्री बार-बार घोषणा करते रहे कि वे एक टैक्स लाएंगे, लेकिन राज्य सरकारें उन पर विश्वास नहीं करती थीं। राज्यों को भरोसा नहीं था कि अगर इस सुधार से उनका राजस्व घटा या घाटा हुआ, तो केंद्र उनकी मदद करेगा। यही वह निर्णायक सोच थी, जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आर्थिक दृष्टिकोण स्पष्ट और उनका दृढ़ संकल्प कि उन्होंने यह कर के दिखाया। उन्होंने राज्यों को विश्वास दिलाया कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि किसी राज्य के राजस्व में कमी आती है या उसकी वृद्धि दर 14% से कम रहती है, तो केंद्र सरकार उसे कंपनसेशन के माध्यम से पूरा करेगी, वह भी पूरे 5 साल तक। यही विश्वास और यह गारंटी इस ऐतिहासिक सुधार को सफल बनाने में निर्णायक साबित हुई।प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी ने कहा कि पहले व्यापार और उद्योग जगत को कितनी जटिलताओं से गुजरना पड़ता था, अलग-अलग अफसरों के यहाँ जाना, तरह-तरह के फॉर्म भरना और टैक्स की उलझनों में फँसना आम बात थी। कहीं एंट्री टैक्स, कहीं सेल्स टैक्स, कहीं सेंट्रल सेल्स टैक्स, तो कहीं एक्साइज ड्यूटी और अलग-अलग सेस। हर राज्य अपने-अपने टैक्स और सेस लगाता था, ऊपर से केंद्र सरकार के टैक्स, ड्यूटी और सेस अलग से लागू होते थे। इन सबके चलते व्यापारियों और उद्योगपतियों पर तो बोझ बढ़ता ही था, उपभोक्ता भी अनजाने में टैक्सों के इस बोझ का हिस्सा बनते थे। समस्या यह थी कि टैक्स मल्टीपल लेवल्स पर लगता था, यानी टैक्स पर भी टैक्स। उदाहरण के लिए, पहले एक्साइज ड्यूटी लगती थी, फिर उसके ऊपर सेल्स टैक्स। इसके बाद ऑक्ट्रॉय लगती थी, जो सेल्स टैक्स और एक्साइज दोनों के ऊपर जुड़ती थी। अगर बीच में 4% का सेंट्रल सेल्स टैक्स लागू हुआ, तो उस पर भी ऑक्ट्रॉय और फिर सेल्स टैक्स लग जाता था। ये सारी कठिनाइयाँ व्यापार जगत और उपभोक्ताओं दोनों के लिए बेहद परेशान करने वाली थीं। लोग यह भी जानते हैं कि “सी-फॉर्म” की जटिलता से व्यापारी किस हद तक परेशान रहते थे। इन सभी समस्याओं को समाप्त करके, जीएसटी ने देश के व्यापार और उद्योग जगत को वास्तविक राहत दी।



