नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखा झारखंड के समग्र विकास का विजन
Chief Minister Hemant Soren presented the vision for Jharkhand's holistic development at the NITI Aayog meeting.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित NITI Aayog की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों और भविष्य की विकास रणनीति को प्रमुखता से रखा। बैठक की अध्यक्षता Narendra Modi ने की। इस वर्ष बैठक का विषय “Inclusive Human Development for Viksit Bharat @2047” रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश की औद्योगिक प्रगति में अपनी खनिज संपदा, श्रमशक्ति और प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन खनिज आधारित विकास को मानव पूंजी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने झारखंड को वर्ष 2050 तक विनिर्माण, हरित अर्थव्यवस्था और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य प्रस्तुत किया।
शिक्षा और पोषण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से लगभग 15 हजार के पास अभी भी अपना भवन नहीं है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा संचालित पोषण अभियान और SAAMAR कार्यक्रमों के माध्यम से कुपोषण एवं स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से आंगनबाड़ी अवसंरचना के विकास में सहयोग की अपेक्षा जताई। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि CM Schools of Excellence के विद्यार्थी IIT, मेडिकल तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो रहे हैं। राज्य सरकार उत्कृष्ट शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से 5,000 नए स्कूलों के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने झारखंड में PM SHRI विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की।
जनजातीय भाषाओं और उच्च शिक्षा को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने राज्य की 32 जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए झारखंड में NCERT के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की मांग रखी। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक सामग्री एवं सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में CM Fellowship Scheme for Academic Excellence तथा Marang Gomke Jaipal Singh Munda Overseas Scholarship जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से राज्य के युवाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अध्ययन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
कौशल विकास और रोजगार पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि Mukhyamantri Sarathi Yojana, Gurukul Training Model और BIRSA Skill Centres के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रोबोटिक्स तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में युवाओं को तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की मांग
बैठक में मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मेडिकल कॉलेजों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर सीटों की वृद्धि तथा नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने केंद्र सरकार से मेडिकल सीटों की स्वीकृति एवं PPP मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों की लंबित मंजूरियां शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया।
खेल और खेल अवसंरचना को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आज हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स और तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, फुटबॉल एवं हॉकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर प्रदान करने की मांग की। साथ ही जनजातीय और पूर्व उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में खेल अवसंरचना एवं आवासीय खेल अकादमियों के लिए विशेष पैकेज की आवश्यकता पर बल दिया।
डेटा आधारित सुशासन और कृषि विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने AI आधारित CM-DIP (Chief Minister Data Intelligence Platform) तथा Integrated Command and Control Centre के माध्यम से राज्य में डेटा आधारित सुशासन को मजबूत बनाने की जानकारी दी। उन्होंने केंद्र से समयबद्ध डेटा साझा करने तथा DBT योजनाओं में डिजिटल धोखाधड़ी रोकने हेतु तकनीकी सहयोग की मांग की। कृषि क्षेत्र में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाओं, Birsa Harit Gram Yojana तथा मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बताई।
औद्योगिक विकास और वित्तीय मुद्दे भी उठाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यहां वैल्यू एडिशन, विनिर्माण, क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योग, अनुसंधान एवं नवाचार के नए केंद्र विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने जल जीवन मिशन की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों एवं केंद्रीय उपक्रमों द्वारा झारखंड की बकाया राशि का भुगतान करने तथा DMFT नियमों की समीक्षा कर राज्यों की भूमिका को मजबूत बनाने का आग्रह भी किया। साथ ही DVC, CCL, ECL सहित अन्य केंद्रीय उपक्रमों के कमांड क्षेत्रों में सामाजिक अवसंरचना निर्माण के लिए भूमि और स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग रखी। विकास में साझेदार के रूप में झारखंड की भूमिका पर बल बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो झारखंड जैसे राज्यों को केवल संसाधनों के स्रोत के रूप में नहीं, बल्कि विकास के साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा को मानव संपदा से, उद्योग को रोजगार से और विकास को सामाजिक न्याय से जोड़ना ही देश और राज्य की प्रगति का मार्ग है।



