गाजियाबाद
लोनी हिरासत प्रकरण पुलिस अपने बचाव में आगे
मगर चोटों पर खामोशी — बिना निष्पक्ष जांच क्लीन चिट पर फिर उठे सवाल
मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटें दर्ज, फिर भी इलाज की जगह जेल भेजा गया — पीड़ित पक्ष ने स्वतंत्र जांच की मांग तेज की
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : ऑटो चालक वकील पुत्र मुस्ताक के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट के दौरान गंभीर चोटें लगने के बावजूद उसे इलाज के स्थान पर सीधे जेल भेजे जाने का मामला लोनी में तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित की शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद क्षेत्रीय अधिकारी अपनी पुलिस टीम के बचाव में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि हिरासत में चोट लगने के सवाल पर वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अधिकारियों ने न तो मामले की गहराई से जांच की, और न ही अब तक परिवार की बात सुनी। इसके उलट, जल्दबाज़ी में संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष लेते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है कि जब शरीर पर गंभीर चोटें दर्ज हैं, तो वे लगी कैसे — और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
“अगर मारपीट नहीं हुई तो चोटें कैसे आईं?” — पीड़ित परिवार का सवाल
पीड़ित पक्ष के अनुसार—
पुलिस का दावा है कि हिरासत में कोई मारपीट नहीं हुई
मगर मेडिकल रिपोर्ट में उसके शरीर पर गंभीर चोटों का उल्लेख है
डॉक्टर ने स्थिति को देखते हुए उसे जीटीबी अस्पताल, दिल्ली रेफर किया तो क्यों, गंभीर चोट
के बावजूद इलाज के बजाय उसे सीधे जेल भेज दिया गया , क्या यह नियम संगत है
सबसे अहम बात यह रही कि क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी मारपीट से जुड़े सवालों पर चुप्पी साधे रहे, लेकिन पुलिस कर्मचारियों के बचाव में कोई देर नहीं की।
“बिना जांच बचाव — क्या सच दबाने की कोशिश?”
पीड़ित वकील का आरोप है कि—
“बिना निष्पक्ष जांच किए पुलिस को क्लीन चिट देना संदेह पैदा करता है। ऐसा लगता है जैसे पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश हो रही है। जब तक चोटों का कारण स्पष्ट नहीं होता, तब तक किसी भी तरह से क्लीन चिट का कोई आधार नहीं बनता।”
स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की फिर उठी मांग
पीड़ित पक्ष ने एक बार फिर मांग दोहराई—
पूरे मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए
घायल को उपचार से वंचित करने वालों पर कार्यवाही हो
दोषी पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उन्हें बचाने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए
पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक सच सामने नहीं आता, वे न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।



