पत्रकार बीमार, खराब रसमलाई खाने से अस्पताल में भर्ती: खाद्य विभाग की लापरवाही पर सवाल, अधिकारी फोन नहीं उठा रहे

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो
बाराबंकी: आवास विकास स्थित गुज्जू होटल में खराब रसमलाई खाने से हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार चौधरी उस्मान अली की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। यह घटना खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।
घटना के बाद जिले के कई पत्रकारों ने सहायक आयुक्त सहित खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के सीयूजी नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि, किसी भी अधिकारी ने फोन उठाना उचित नहीं समझा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन सीयूजी नंबरों को 24 घंटे सक्रिय रखने के सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन बाराबंकी में ये आदेश केवल कागजों तक सीमित दिख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, खाद्य विभाग के अधिकारी कथित तौर पर ‘सुविधा शुल्क’ लेकर दूषित दूध उत्पाद और मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री को बढ़ावा दे रहे हैं। आरोप है कि विभाग की कार्रवाई केवल चुनिंदा दुकानों तक ही सीमित रहती है, जिससे बड़े मिलावटखोर बेखौफ होकर अपना धंधा चला रहे हैं।
कुछ समय पहले शहर के बड़ेल स्थित दरबारी मिठाई की दुकान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में मिठाई काउंटर में चूहे घूमते हुए दिखाई दिए थे और दुकान में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था का अभाव था। इसके बावजूद, खाद्य विभाग ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे अधिकारियों और दुकानदारों के बीच सांठगांठ की चर्चाएं तेज हो गईं।
यह मामला यहीं नहीं रुकता। हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में परोसे गए भोजन की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठे थे। हालांकि, जिम्मेदार सीडीपीओ ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया। यह दर्शाता है कि बच्चों और महिलाओं के लिए बनने वाला सरकारी भोजन भी सुरक्षित नहीं है।
हालांकि, एफएसएसएआई (FSSAI) की टीम ने बीते दिनों मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाते हुए बेकरियों से सैंपल लिए थे। सफेदाबाद स्थित मेसर्स स्वास्तिक बिस्कुट प्रतिष्ठान पर भी छापा मारा गया और केक तथा बेकरी उत्पादों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप अभी भी बरकरार हैं।
इन घटनाओं के बाद यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या जनपद का खाद्य विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें तभी खुलेंगी जब किसी की जान चली जाएगी?



