लखनऊ

लखनऊ नगर निगम मुख्यालय पर सफाई कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन, 

ठेका प्रथा और कम वेतन के खिलाफ उठाई आवाज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लखनऊ : लखनऊ नगर निगम मुख्यालय पर बुधवार को सैकड़ों सफाई कर्मचारियों ने ठेका प्रथा और कम वेतन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा और ठेका प्रथा को समाप्त करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शन के दौरान तख्तियों और झंडों के साथ कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों की मांगें: सफाई कर्मचारियों ने ठेका प्रथा के तहत होने वाले शोषण पर गहरी नाराजगी जताई। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं: ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थायी नौकरी प्रदान करना।
न्यूनतम वेतन और समय पर भुगतान की गारंटी। बेहतर कार्य परिस्थितियों और सुरक्षात्मक उपकरणों की व्यवस्था। सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, और भविष्य निधि कर्मचारियों का कहना है कि ठेका प्रथा के कारण उन्हें न केवल कम वेतन मिलता है, बल्कि नौकरी की असुरक्षा और खराब कार्य परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। एक प्रदर्शनकारी, रामू (बदला हुआ नाम), ने कहा, “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हमें हमारे श्रम का उचित मूल्य नहीं मिलता। ठेका प्रथा ने हमें गुलामी की जंजीरों में जकड़ रखा है।” प्रदर्शन के कारण नगर निगम मुख्यालय के बाहर कुछ समय के लिए कामकाज प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन और ठेकेदारों पर श्रम कानूनों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया।

नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम स्थिति को समझ रहे हैं और कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। हमारा प्रयास है कि सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर समाधान निकाला जाए।” हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बार-बार केवल आश्वासन मिलते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती। ठेका प्रथा के तहत कर्मचारियों को स्थायी नौकरी, सामाजिक सुरक्षा, और उचित वेतन से वंचित रखा जाता है। यह प्रथा न केवल आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती है, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों का भी हनन करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठेका प्रथा को नियंत्रित करने और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।

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