असम

विद्या भारती द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में पांच-पद अधिगम पद्धति प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम : अरुणाचल शिक्षा विकास समिति के तत्वावधान में नाहरलागुन के पच्छिम कलनी स्थित एएसवीएस प्रशिक्षण केंद्र में “विद्या भारती — पूर्वोत्तर क्षेत्र: पंचपदी अधिगम पद्धति प्रशिक्षण कार्यशाला” का शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 मई 2026 तक चलेगा और इसमें पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से विद्या भारती के मास्टर ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं। उद्घाटन समारोह में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अखिल भारतीय संगठन मंत्री गोविंद चंद्र महंत, वीबीएबीएसएस के उप-अध्यक्ष डी. रामकृष्ण राव तथा विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री डॉ. पवन तिवारी मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में कई गणमान्य पदाधिकारी और सामाजिक-शैक्षिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की भूमिका पर बल देते हुए उद्घोषकों ने कहा कि संस्कार आधारित शिक्षा, आधुनिक शिक्षण-शैक्षिक पद्धतियाँ और शिक्षक की सक्रिय भागीदारी शैक्षिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित शिक्षा समाज एवं राष्ट्र के उज्जवल भविष्य के निर्माण में अहम योगदान देगी। शिशु शिक्षा समिति, असम के प्रचार संयोजक मुकुटेश्वर गोस्वामी ने गुवाहाटी में मीडिया को बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचपदी अधिगम पद्धति को और अधिक प्रभावी बनाकर विद्या भारती के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता को मजबूती प्रदान करना है। इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स को विशेष सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अपने-अपने राज्यों में इस पद्धति को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। कार्यशाला के अगले दिनों में विभिन्न शैक्षिक सत्र, व्यावहारिक प्रदर्शन, समूह चर्चा और इंटरएक्टिव गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। ये सत्र शिक्षण प्रौद्योगिकी, पठन-लेखन कौशल, मूल्य आधारित पाठ्यक्रम संचालन और कक्षा प्रबंधन जैसे विषयों पर केंद्रित होंगे। आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र के विद्या भारती स्कूलों में सीखने-समझने की प्रक्रियाओं को नया आयाम देगी और समग्र शैक्षिक परिणामों में सुधार लाएगी। कार्यशाला के समापन पर भागीदारों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे और स्थानीय स्तर पर पद्धति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शन व अनुवर्ती कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की जाएगी। आयोजकों ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय जरूरतों और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी-केंद्रित और मूल्य-आधारित शिक्षा प्रभावी रूप से प्रवाहित हो सके।

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