इथनॉल 20 के नाम पर पेट्रोल डिपो में लूट
केरोसिन व अन्य द्रव मिलाकर ग्राहकों से धोखाधड़ी का आरोप।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के विभिन्न इलाकों में इथनॉल 20 मिश्रित पेट्रोल की आड़ में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर उपभोक्ताओं के बीच गहरा रोष देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उठी शिकायतों में आरोप है कि कुछ तेल डिपो इथनॉल 20 के अतिरिक्त केरोसिन तेल और अन्य तरल पदार्थ मिलाकर पेट्रोल की गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं और इस तरह ग्राहकों के साथ आर्थिक लूटपाट कर रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित 20 प्रतिशत इथनॉल मिश्रण की सीमा का पालन किए बिना, कुछ डिपो मनमाने तरीके से मिलावट कर रहे हैं, जिससे न केवल वाहनों की कार्यक्षमता पर असर पड़ने की आशंका है, बल्कि उपभोक्ताओं को उनके पैसे का पूरा मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। देशभर में इथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक मानकों और सरकारी निगरानी के दावों के साथ लागू किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी और विभागीय उदासीनता की वजह से मिलावटखोरी को बढ़ावा मिलने का संदेह जताया जा रहा है। कई उपभोक्ता संगठनों और जागरूक नागरिकों ने आरोप लगाया है कि कुछ पेट्रोल डिपो पर माप–तौल में गड़बड़ी के साथ-साथ घटिया और मिलावटी ईंधन दिए जाने की प्रवृत्ति भी देखी गई है, जिसके चलते वाहन मालिकों को बार–बार गाड़ी खराब होने, माइलेज कम होने और मरम्मत खर्च बढ़ने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। शिकायतें यह भी इंगित करती हैं कि पारदर्शिता के अभाव में पंपों पर उपलब्ध ईंधन की वास्तविक संरचना और इथनॉल की सही मात्रा की जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से नहीं दी जा रही है। इन गंभीर आरोपों के संदर्भ में स्थानीय नागरिकों ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि पेट्रोल व तेल डिपो की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लोगों की मांग है कि सभी डिपो पर नमूना परीक्षण, माप–तौल की सघन जांच और रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल कर दोषी पाए जाने वाले संचालकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की कथित लूट और मिलावटखोरी पर पूर्ण विराम लगाया जा सके। साथ ही, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, पारदर्शी डिस्प्ले बोर्ड और शिकायत निवारण की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी जोरदार अपील की जा रही है।



