बागपत
मुफ्त में सामान देने से इनकार बना खूनी दुश्मनी की वजह
11 साल पुरानी रंजिश में व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या!

बड़ौत के चर्चित दोहरे हत्याकांड में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी की भी मौत, 19 मुकदमों का था लंबा आपराधिक रिकॉर्ड
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत : बागपत जनपद के बड़ौत नगर में मुख्य बस स्टैंड के निकट दिनदहाड़े हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके पुत्र विकास अग्रवाल की गोली मारकर हत्या किए जाने के पीछे वर्षों पुरानी रंजिश सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस दुश्मनी की शुरुआत मुफ्त में सामान लेने और बाद में उससे इनकार किए जाने के बाद हुई थी, जिसने समय के साथ खूनी संघर्ष का रूप ले लिया।
सूत्रों के अनुसार कुख्यात अपराधी वरुण उर्फ वरुण लुहारी लंबे समय तक व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल की दुकान से बिना भुगतान किए सामान लेता रहा। बताया जाता है कि भय और दबाव के माहौल में व्यापारी कई बार उसे सामान देते रहे, लेकिन जब यह सिलसिला लगातार बढ़ता गया तो सोहनलाल ने मुफ्त में सामान देने से साफ इनकार कर दिया। यही बात वरुण को नागवार गुजरी और दोनों पक्षों के बीच रंजिश की नींव पड़ गई।
17 जुलाई 2015 को हुआ था खूनी संघर्ष
बताया जाता है कि 17 जुलाई 2015 को यह विवाद हिंसक रूप ले बैठा था। आरोप है कि वरुण लुहारी अपने भाई कपिल और अन्य साथियों के साथ सोहनलाल अग्रवाल की दुकान पर पहुंचा और वहां हमला कर दिया। दोनों पक्षों के बीच जमकर फायरिंग हुई। इस दौरान गोली लगने से कपिल की मौत हो गई थी, जबकि सोहनलाल के बेटों राजेश अग्रवाल, दीपक अग्रवाल और विकास अग्रवाल को भी गोलियां लगी थीं।
इस घटना के बाद पूरे बड़ौत नगर में भारी तनाव और बवाल की स्थिति पैदा हो गई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया था और मामला लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। हालांकि समय बीतने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच की रंजिश पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
दिनदहाड़े दोहरे हत्याकांड से दहला बड़ौत
वर्षों पुरानी इसी दुश्मनी की पृष्ठभूमि में अब मुख्य बस स्टैंड के निकट टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके पुत्र विकास अग्रवाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
सूत्रों के अनुसार वारदात में करीब आधा दर्जन हमलावरों के शामिल होने की चर्चा है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
गिरफ्तारी की मांग को लेकर बस स्टैंड जाम
दोहरे हत्याकांड के बाद मृतकों के परिजनों, व्यापारियों और नगरवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लोगों ने मुख्य बस स्टैंड क्षेत्र में जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि यदि हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर समय रहते कठोर कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था।
उपचार के दौरान वरुण लुहारी की भी मौत
सूत्रों के अनुसार इस घटनाक्रम में घायल हुए मुख्य आरोपी वरुण उर्फ वरुण लुहारी की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के दौरान उसे गोली लगी थी, जिसके बाद उसे पुलिस अभिरक्षा में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक पुष्टि का इंतजार था।
वरुण लुहारी की मौत के बाद यह मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है। एक ओर जहां व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या से क्षेत्र में शोक और आक्रोश है, वहीं मुख्य आरोपी की मौत ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
आखिर कौन था वरुण उर्फ वरुण लुहारी?
व्यापारी पिता-पुत्र हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद वरुण उर्फ वरुण लुहारी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह बड़ौत कोतवाली का दर्ज हिस्ट्रीशीटर था और लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा था।
पुलिस अभिलेखों के अनुसार उसके खिलाफ कुल 19 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इनमें हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, बलवा, मारपीट, रंगदारी, धमकी और अन्य गंभीर अपराध शामिल थे। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 147, 148, 149, 307, 323, 325, 342, 379, 384, 411, 504 और 506 के तहत भी मुकदमे दर्ज बताए जाते थे।
इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा के सोनीपत जिले में भी उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में मिलता है। पुलिस की निगरानी सूची में शामिल रहने के बावजूद उस पर लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगते रहे थे।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
बड़ौत जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र में दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज वारदात ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाता तो यह घटना टाली जा सकती थी। वहीं पुलिस का दावा है कि मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कर दी गई हैं और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।
फिलहाल बड़ौत नगर में शोक, आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है। व्यापारी समुदाय न्याय की मांग कर रहा है और पूरे क्षेत्र की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




