
कोलकाता। क्या बंगाल सरकार का यह नया और कड़ा कानून राज्य से हिंसक प्रदर्शनों का खात्मा कर पाएगा? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इस सख्त चेतावनी और तीन गुना जुमार्ने के प्रावधान के बाद क्या अब पश्चिम बंगाल में औद्योगिक संपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित हो पाएंगी? इस नए कानून के लागू होने से निवेशकों का भरोसा बहाल होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
पश्चिम बंगाल की सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि अब सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की खैर नहीं होगी। नए कानून के तहत उपद्रवियों से नुकसान की तीन गुना कीमत वसूली जाएगी। शनिवार शाम को भवानीपुर में नागरिक समाज और व्यापारिक समुदाय के सदस्यों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने यह बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन इसकी आड़ में हिंसा या औद्योगिक इकाइयों को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है सरकार का नया कानून?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कोई दोषी हजार्ना देने में विफल रहता है, तो उसकी निजी संपत्तियों को नीलाम करके यह राशि वसूल की जाएगी। दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा ने बीते 28 जून को कानून-व्यवस्था से जुड़े दो बेहद कड़े विधेयक पारित किए हैं। इनका सीधा मकसद संगठित अपराध और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वालों पर नकेल कसना है। इनमें से पहला कानून ‘वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस आॅफ पब्लिक आॅर्डर (अमेंडमेंट) एक्ट’ है। यह दंगों, गैरकानूनी सभाओं और हिंसक प्रदर्शनों के दौरान होने वाले नुकसान के लिए सीधे तौर पर व्यक्तियों को वित्तीय रूप से जवाबदेह बनाता है।
कानून की पांच सबसे बड़ी बातें
तीन गुना भारी जुमार्ना: तोड़फोड़ करने पर संपत्ति के वास्तविक मूल्य से तीन गुना अधिक की आर्थिक रिकवरी की जाएगी।
प्रॉपर्टी होगी नीलाम: जुमार्ना न चुकाने की स्थिति में आरोपी की अपनी संपत्ति को कुर्क और नीलाम किया जाएगा।
बिना ट्रायल 12 महीने जेल: कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों को 12 महीने तक बिना ट्रायल हिरासत में रखा जा सकता है।
औद्योगिक सुरक्षा पर ध्यान: फैक्ट्रियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जबरन बंद कराने या नुकसान पहुंचाने पर सीधे जेल होगी।
निवेशकों में जगेगा भरोसा: औद्योगिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर राज्य में निवेश के माहौल को मजबूत किया जाएगा।
क्या 12 महीने की जेल का डर उपद्रवियों को रोकेगा?
सरकार का दूसरा बड़ा हथियार ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल आॅफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल’ है। इस नए कानून के तहत असामाजिक गतिविधियों में शामिल संदिग्धों को बिना किसी मुकदमे के 12 महीने तक निवारक हिरासत में रखने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने एक उदाहरण देकर समझाया, ‘अगर कोई किसी औद्योगिक इकाई को जबरन बंद कराता है और वहां तोड़फोड़ करता है, तो उसे जेल की हवा खानी होगी। साथ ही उसे नुकसान का तीन गुना जुमार्ना भी देना होगा। मान लीजिए कि अगर क्षतिग्रस्त संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपये है, तो उपद्रवी को तीन करोड़ रुपये चुकाने होंगे। सरकार का मानना है कि इस सख्त कदम से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।



