
लखनऊ। राज्यपाल ने बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में करुणा और संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने एक परित्यक्त बच्ची के संघर्ष और सफलता का उदाहरण दिया। साथ ही शिक्षा, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण को भारत के भविष्य की महत्वपूर्ण दिशा बताया।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन ने हाल ही में 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि हमारे भीतर करुणा होती तो ऐसी घटनाएं कभी नहीं होतीं। उन्होंने एक प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किया।
उन्होंने बताया कि एक नवजात बच्ची को उसके जन्मदाता लावारिस छोड़ गए थे, लेकिन एक सब्जी विक्रेता उसे अपने घर ले गया, उसका पालन-पोषण किया और आज वही बच्ची आईएएस अधिकारी बन चुकी है। ये दोनों घटनाएं हमारे समाज का आईना हैं और हमें आत्ममंथन करने की जरूरत है।
‘ज्ञान का समन्वय भारत की नई पहचान बन रहा’
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है, जिनमें ज्ञान का विशाल भंडार सुरक्षित है। तकनीक और ज्ञान का समन्वय भारत की नई पहचान बन रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भाषा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। जनवरी 2026 में हुए समझौता ज्ञापन के तहत कई विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में ज्ञान और तकनीक के आदान-प्रदान के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।
राज्यपाल बोलीं-लड़कियां पढ़ाई के दौरान गर्भवती हो जाती हैं-राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एकेटीयू दीक्षांत समारोह में मंगलवार को छात्र-छात्राओं से खुलकर बात की थी। राजधानी के सिद्धीखेड़ा बालिका गृह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज कल लड़के-लड़कियां पहले भाग जाते हैं। फिर लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती है और ऐसे बच्चे बाद में सरकार के भरोसे हो जाते हैं। उन्हें कोई स्वीकार नहीं करता है और वे बालगृह में पहुंचा दिए जाते हैं।
सामने बैठे छात्र-छात्राओं से उन्होंने कहा कि यह आप सबका पराक्रम है। ऐसा पराक्रम न करिए। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा भी बंगलौर पढ़ने गया था। मैंने कहा कि कोई लड़की पसंद हो तो बताना, मैं शादी कर दूंगी। हालांकि उसने ऐसा नहीं किया। आपको कोई पसंद आए तो पहले आत्मनिर्भर बनिए, फिर शादी कीजिए। मैं लव मैरिज की विरोधी नहीं हूं। लेकिन आत्मनिर्भर होने तक शादी न करिए, कुछ गलत न करिए।



