सिंगरौली

दो साल तक बंद रही आंगनबाड़ी

अब नोटिस से बच पाएंगे जिम्मेदार? चितरंगी परियोजना में बड़ा सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चितरंगी विकासखंड के आंगनबाड़ी केंद्र नौडिहवा क्रमांक-2 के करीब दो वर्षों तक बंद रहने का मामला सामने आने के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक केंद्र बंद रहने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी, और अब मामले के उजागर होने के बाद केवल नोटिस जारी कर औपचारिक कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र बंद रहने से क्षेत्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ प्रभावित हुआ। बच्चों के पोषण, टीकाकरण, प्री-स्कूल शिक्षा और अन्य सेवाएं भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि केंद्र वास्तव में दो वर्षों तक बंद था, तो इस दौरान विभागीय निरीक्षण कैसे होता रहा? क्या सुपरवाइजर, सेक्टर पर्यवेक्षक और सीडीपीओ ने कभी मौके पर जाकर जांच नहीं की? यदि निरीक्षण हुआ तो वास्तविक स्थिति रिपोर्ट में क्यों नहीं आई?

विभागीय सूत्रों के अनुसार संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। लेकिन लोगों का कहना है कि केवल कार्यकर्ता पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि निगरानी करने वाले अधिकारियों ने समय पर निरीक्षण किया होता तो मामला दो वर्ष तक नहीं खिंचता।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि केंद्र बंद रहने के दौरान पोषण आहार, बच्चों की उपस्थिति, टीकाकरण और अन्य योजनाओं का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया गया। यदि रिकॉर्ड में अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी का नहीं, बल्कि विभाग की पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि एक केंद्र दो वर्षों तक बंद रह सकता है, तो जिले के अन्य केंद्रों की स्थिति क्या है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

अब निगाहें जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग पर हैं। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि बच्चों के पोषण और भविष्य से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।

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