ऑपरेटर की पत्नी कैसे बनी सहायिका? सिंगरौली के महिला एवं बाल विकास विभाग में भर्ती पर उठे बड़े सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। सिंगरौली जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। जिले के मुहेर क्षेत्र में हुई एक नियुक्ति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि विभाग में कार्यरत एक ऑपरेटर की पत्नी को सहायिका के पद पर चयनित किया गया। अब इस चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग का कर्मचारी स्वयं उसी विभाग में प्रभावशाली भूमिका में कार्यरत हो और उसके परिवार के सदस्य का चयन हो जाए, तो स्वाभाविक रूप से यह जानना जरूरी हो जाता है कि पूरी चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों, पात्रता और मेरिट के आधार पर हुई या नहीं। लोगों का सवाल है कि क्या अन्य पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर मिला? क्या चयन सूची और प्राप्त अंकों का सार्वजनिक परीक्षण कराया गया?
इस पूरे मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) जितेंद्र गुप्ता और संबंधित परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन पारदर्शिता को लेकर उठ रही शंकाओं ने विभाग की कार्यशैली पर बहस तेज कर दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भर्ती पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है, तो विभाग को चयन सूची, पात्रता, मेरिट और चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक कर देने चाहिए। इससे सभी तरह की आशंकाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। लेकिन यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो संदेह और गहरा सकता है।
चर्चा केवल भर्ती तक सीमित नहीं है। जिले की कई आंगनबाड़ियों को लेकर पहले से ही पोषण आहार वितरण, बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, मीनू के पालन और निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठने से विभाग की जवाबदेही और बढ़ गई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे बच्चों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा विभाग है। ऐसे विभाग में यदि नियुक्तियों पर भी सवाल उठने लगें, तो निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन को पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ हो, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
अब जिले की जनता की नजर जिला प्रशासन पर है। लोगों की मांग है कि मुहेर सहायिका भर्ती सहित हाल के वर्षों में हुई अन्य भर्तियों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के अनुसार हुईं या नहीं। पारदर्शिता ही ऐसे सभी विवादों का सबसे प्रभावी उत्तर हो सकती है।



