1000 करोड़ का DMF फंड बाहर भेजा
नतीजा- सिंगरौली की जनता पी रही पारा-लेड युक्त 'धीमा जहर': राजेश सोनी
सिंगरौली के पानी में पारा 124 गुना व लेड 77 गुना अधिक मिलना सीधे तौर पर ‘प्रशासनिक हत्या’ का प्रयास
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली (मध्य प्रदेश) I आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव राजेश सोनी ने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), भोपाल की हालिया वैज्ञानिक रिपोर्ट को लेकर जिला प्रशासन,प्रदेश सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर करारा हमला बोला है। राजेश सोनी ने कहा कि AIIMS की स्टडी ने साबित कर दिया है कि सिंगरौली की जनता को हवा और पानी के जरिए ‘धीमा जहर’ (Slow Poison) परोसा जा रहा है। पानी में पारा तय सीमा से 124 गुना, लेड 77 गुना और कैडमियम 41 गुना अधिक मिलना यहां की जनता की जिंदगी से खिलवाड़ और गंभीर आपराधिक लापरवाही है।
“मेरे द्वारा उजागर 1000 करोड़ के DMF घोटाले का ही दुष्परिणाम”
प्रेस को संबोधित करते हुए राजेश सोनी ने याद दिलाया कि उन्होंने कुछ समय पूर्व सर्किट हाउस वैढ़न में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रामाणिक दस्तावेजों के साथ यह खुलासा किया था कि सिंगरौली के हक की करीब 1000 करोड़ रुपये की DMF (जिला खनिज प्रतिष्ठान) राशि पिछले 5 वर्षों में सीहोर, पन्ना, भोपाल, सागर जैसे अन्य जिलों में गैर-कानूनी तरीके से बांट दी गई।
राजेश सोनी ने तीखा सवाल दागते हुए कहा, “यदि सिंगरौली की वह 1000 करोड़ रुपये की DMF राशि दूसरे जिलों में लुटाने की बजाय यहीं के गांवों (चितरंगी देवसर,बैढ़न आदि) में शुद्ध पेयजल पाइपलाइन,वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च की गई होती,तो आज हमारे लोगों की किडनी,लिवर और दिल खतरे में न होते। जनप्रतिनिधियों की खामोशी और प्रशासनिक डाके की वजह से आज सिंगरौली का आम नागरिक जहरीला पानी पीने को मजबूर है,राजेश सोनी ने विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि मेडिकल इमरजेंसी व विशेष कैंप: भारी धातुओं के जहर से प्रभावित बस्तियों में तुरंत AIIMS व विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भेजकर निःशुल्क इलाज और ब्लड/किडनी जांच शुरू कराई जाए,टैंकरों व RO से तत्काल शुद्ध जल सप्लाई प्रभावित गांवों में तुरंत टैंकरों और RO प्लांट के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए, सिंगरौली के हक का जो 1000 करोड़ रुपये बाहर भेजा गया है, उसे तुरंत वापस मंगाकर पेयजल परियोजनाओं में लगाया जाए,प्रदूषणकारी कंपनियों पर कार्रवाई किया जाए भारी धातुएं छोड़ने वाले पावर प्लांटों और खदानों पर एनवायरनमेंटल पेनल्टी ठोंकी जाए।
राजेश सोनी ने स्पष्ट किया कि यदि जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार ने 15 दिवस के भीतर प्रभावित इलाकों में शुद्ध पानी और स्वास्थ्य सेवाएं देना शुरू नहीं किया, तो कलेक्ट्रेट का ऐतिहासिक महाघेराव किया जाएगा और इस मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तथा मानवाधिकार आयोग में ले जाया जाएगा।



