बरेली
कृष्ण का साया है सुकून, जहां प्रेम है वहां जीवन है

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली : कृष्ण केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली चेतना हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराना सिखाती है। जब मन परेशान हो, रिश्तों में दूरी बढ़ रही हो, समाज में तनाव हो, तब कृष्ण का स्मरण मन को सुकून देता है। यही कारण है कि सदियों बाद भी कृष्ण हर उम्र और वर्ग के करीब हैं।
कृष्ण ने सिखाया कि परिस्थितियां हमेशा हमारे अनुसार नहीं होंगी, लेकिन उनका सामना करने का तरीका हमारे हाथ में है। कुरुक्षेत्र में अर्जुन जब भ्रमित हुए, तब कृष्ण ने कर्म का संदेश दिया। आज भी यह संदेश प्रासंगिक है। युवा निराशा में हैं, बच्चे प्रतिस्पर्धा के दबाव में हैं, परिवार समय की कमी से जूझ रहे हैं और बुजुर्ग अकेलेपन में हैं। ऐसे में कृष्ण का संदेश भीतर से मजबूत करता है- कर्तव्य करो, परिणाम की चिंता में स्वयं को मत खोओ।
कृष्ण की सबसे बड़ी खूबसूरती उनका प्रेम है। उनकी बांसुरी याद दिलाती है कि जीवन में मधुरता धन से नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार, मीठी वाणी और सम्मान से आती है। आज समाज को इसी मधुरता की जरूरत है।
कृष्ण को समझना केवल मंदिर में दीप जलाना नहीं है। किसी भूखे को भोजन देना, दुखी का सहारा बनना, माता-पिता का सम्मान, बच्चों को संस्कार देना और प्रकृति की रक्षा करना भी भक्ति का रूप है।
जिस घर में प्रेम है, वहां कृष्ण हैं। जिस परिवार में बुजुर्गों का सम्मान है, वहां कृष्ण हैं। जिस विद्यालय में संस्कार मिलते हैं, वहां कृष्ण हैं। जिस समाज में कमजोर की आवाज सुनी जाती है, वहां कृष्ण हैं।
जरूरत है कि कृष्ण को केवल उत्सव और झांकियों तक सीमित न रखें, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारें। जन्माष्टमी पर संकल्प लें कि अपने शब्दों से किसी का मन नहीं दुखाएंगे, कर्मों से किसी का हक नहीं छीनेंगे और जहां संभव हो, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे।
कृष्ण का साया वहीं है, जहां प्रेम, करुणा, सत्य और मानवता है।
प्रवीण कुमार शर्मा, प्रवक्ता व्यावसायिक शिक्षक, विष्णु इंटर कॉलेज, बरेली



