सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, जुमार्ना वसूली के आदेश पर भी रोक
प्रयागराज। सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी। इसके साथ ही नगर मजिस्ट्रेट की ओर से छह करोड़ 41 लख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में वसूलने के आदेश पर भी हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। मस्जिद कमेटी से हजार्ना वसूलने का आदेश जारी किया गया था। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया।
क्या है पूरा मामला-सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे और अदालती फैसलों से जुड़ा हुआ है। मार्च 2025 में बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की, जिसमें कलेक्ट्रेट की 315 वर्ग मीटर जमीन (खसरा सं. 539) पर बने इस ढांचे को अवैध बताया गया।
प्रशासन का कहना था कि यह परिसर की पुरानी विश्रामशाला की जमीन थी, जिसे बिना अनुमति धार्मिक ढांचे में बदला गया, जबकि मस्जिद कमेटी का दावा था कि यह 100 साल से अधिक पुरानी और वक्फ में दर्ज संपत्ति है। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ढांचे को बेदखली का आदेश देते हुए भारी जुमार्ना लगाया। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला जज की अदालत में अपील की, लेकिन 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने याचिका खारिज कर सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा।
पांच सितंबर को ध्वस्त कर दी गई थी मस्जिद- इसके बाद 5 सितंबर 2026 की देर रात से 6 सितंबर के तड़के के बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के सभी मुख्य द्वारों को सील कर और भारी सुरक्षा बल तैनात कर बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। ध्वस्तीकरण के तुरंत बाद मस्जिद कमेटी ने इस कार्रवाई को बिना पर्याप्त नोटिस और अवैध बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर 11 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार और प्रशासन से जवाब मांगते हुए मस्जिद कमेटी से जुमार्ना वसूली पर रोक लगा दी।



