बेतुल
बैतूल चिचोली नगर परिषद में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा!
सड़क-नाली निर्माण से लेकर जेम पोर्टल खरीदी और बाजार वसूली में भ्रष्टाचार के आरोप

पार्षद ने आयुक्त से की उच्चस्तरीय जांच की मांग, अप्रैल में जारी जांच आदेश पर कार्रवाई नहीं होने का दावा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। चिचोली नगर परिषद में खरीदी, निर्माण कार्यों, बाजार वसूली और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 15 स्थित सुभाष वार्ड की पार्षद नेहा रूपेश आर्य ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को शिकायत सौंपकर पिछले कई वर्षों के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में पूर्व एवं वर्तमान सीएमओ और परिषद अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जेम पोर्टल से खरीदी, सड़क-नाली निर्माण, बाजार से होने वाली आय, मस्टररोल और स्वच्छ भारत मिशन के खर्च में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। पार्षद के अनुसार, विभाग ने 15 अप्रैल 2026 को जांच के आदेश जारी किए थे, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
– 100 कुर्सियों के भुगतान पर सवाल, मौके पर मिलीं केवल 15-20
शिकायत में वर्ष 2021-22 के दौरान कोडर घाट स्थित मोक्षधाम के लिए 100 आरसीसी कुर्सियों की खरीदी के नाम पर 4 लाख 99 हजार 900 रुपये के भुगतान का मामला उठाया गया है। पार्षद के अनुसार, मौके पर केवल 15 से 20 कुर्सियां ही मिलीं। ऐसे में शेष कुर्सियों की खरीदी और भुगतान की जांच की मांग की गई है। इसी तरह, वर्ष 2020-21 में हाईमास्ट लाइट की खरीदी प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। शिकायत में खरीदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर किए जाने की बात कही गई है। पार्षद ने इस मामले में विभागीय जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
– तालाब परिसर के कार्यों और भुगतान की जांच की मांग
नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 9 स्थित तालाब परिसर में पेविंग ब्लॉक, फाउंटेन, लाइटिंग, झूले, वेलकम गेट, वृक्षारोपण और अन्य विकास कार्यों पर खर्च की गई राशि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्षद ने इन कार्यों की वास्तविक स्थिति और भुगतान का मिलान कराने की मांग की है। परिसर में करीब 16 लाख रुपये की लागत से बने सामुदायिक शौचालय की अधूरी और खराब स्थिति का मुद्दा भी शिकायत में शामिल है। इसके अलावा, 9 मीटर ऊंचे और 180 वाट के एलईडी हाईमास्ट पोल की 1 लाख 23 हजार 900 रुपये प्रति नग की दर से खरीदी पर सवाल उठाते हुए कीमत और खरीदी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
– सड़क निर्माण और ठेकों में भी अनियमितताओं के आरोप
शिकायत के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में कुछ निर्माण एजेंसियों को बार-बार ठेके दिए जाने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कमी के आरोप हैं। इनमें वंदागी कंस्ट्रक्शन, चिचोली और जय युगणीया ड्रिलिंग कंपनी, खेड़ी सावलीगढ़ के नाम शामिल हैं। वार्ड क्रमांक 8 में सुधीर जायसवाल से बरकाती गेट तक करीब 44 लाख रुपये, वार्ड क्रमांक 7 और 4 के बीच जयस्तंभ चौक से दुगर्दिया चौक तक लगभग 56 लाख रुपये तथा सुल्तान मार्ग से गोस्वामी किराना तक करीब 13 लाख रुपये के वेयरिंग कोट निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
वार्ड क्रमांक 6 में बारसाधाई गौशाला के पास नदी किनारे करीब 28 लाख रुपये की लागत से बनाई गई दीवार की मजबूती पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं, मंडई घाट निर्माण के लिए स्वीकृत 10.80 लाख रुपये के कार्य में निर्माण नहीं होने और राशि का आहरण किए जाने का आरोप लगाया गया है। पार्षद ने इन कार्यों की स्थल जांच, तकनीकी परीक्षण और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
– बाजार वसूली में अंतर और मस्टररोल पर सवाल
नगर परिषद की आय के प्रमुख स्रोत साप्ताहिक और दैनिक बाजार की वसूली को लेकर भी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पार्षद के अनुसार, साप्ताहिक बाजार से प्रति सप्ताह करीब 25 से 30 हजार रुपये की वसूली होने के बावजूद परिषद के खाते में लगभग 6 हजार रुपये ही दर्शाए जाने का दावा है। दुकानदारों से नियमित रसीद दिए बिना वसूली किए जाने और दैनिक बाजार की आय का पूरा हिसाब दर्ज नहीं होने की आशंका भी जताई गई है।
इसके अलावा, पिछले पांच से छह वर्षों में ऐसे लोगों के नाम पर मस्टररोल तैयार कर भुगतान किए जाने का आरोप है, जो कथित तौर पर नगर परिषद में काम नहीं करते। जेसीबी और अन्य वाहनों के किराये के बिलों में वास्तविक कार्य अवधि से अधिक घंटे दर्शाकर भुगतान किए जाने की शिकायत भी की गई है। पार्षद ने इन मामलों में संबंधित अभिलेखों, बिलों और भुगतान की जांच कराने की मांग की है।
– बस स्टैंड निर्माण और स्वच्छता मद के खर्च की जांच की मांग
शिकायत में वार्ड क्रमांक 1 और 15 में आरसीसी नाली निर्माण के लिए स्वीकृत 48 लाख रुपये की राशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्षद का आरोप है कि वर्ष 2022 में टेंडर जारी होने के बाद नाली निर्माण कराने के बजाय मद परिवर्तन कर सामग्री खरीदी गई। वार्ड क्रमांक 4 में करीब 96 लाख रुपये की लागत से बने नए बस स्टैंड में स्वीकृत डिजाइन से बदलाव और गुणवत्ताहीन सामग्री के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है।
वहीं, वार्ड क्रमांक 5 स्थित विवेकानंद ट्रेंचिंग ग्राउंड में जेसीबी मशीनों और कचरा प्रबंधन के नाम पर किए गए खर्च तथा स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार-प्रसार पर व्यय की गई राशि की जांच की मांग की गई है। पार्षद ने इन सभी मामलों में स्वीकृत राशि, वास्तविक कार्य और भुगतान का मिलान कराने की मांग की है।
– आयुक्त के जांच आदेश पर कार्रवाई की मांग
पार्षद ने शिकायत की प्रतिलिपि नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, संयुक्त संचालक नर्मदापुरम संभाग, प्रमुख अभियंता, अधीक्षक अभियंता और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को भी भेजी है। शिकायत में विभाग के 15 अप्रैल 2026 के आदेश क्रमांक या.प्र./7/2026/5748 का उल्लेख करते हुए जांच की प्रगति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
नेहा रूपेश आर्य ने मांग की है कि नगर परिषद में पिछले वर्षों के दौरान हुई खरीदी, निर्माण कार्यों, बाजार वसूली और अन्य वित्तीय मामलों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, दस्तावेजों और भुगतान अभिलेखों का परीक्षण कर अनियमितताएं प्रमाणित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।



