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सीजीसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास

इतिहास में पहली बार हटाने का प्रस्ताव संसद में पेश

नई दिल्ली : विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव का नोटिस दिया है, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाया गया है। इंडिया गठबंधन समेत 190 से अधिक सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित यह नोटिस, किसी सीईसी को संसदीय प्रक्रिया से हटाने का पहला प्रयास है।
विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में नोटिस जमा कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की मांग की है। सूत्रों के हवाले से मिली रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहली बार है कि किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से हटाने का अनुरोध किया जा रहा है। सांसदों ने एसआईआर प्रक्रिया के संचालन में गंभीर खामियों का आरोप लगाया, जिससे उनके अनुसार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता हुआ है।
सूत्रों ने कहा, हस्ताक्षरकतार्ओं में ह्यइंडियाह्ण गठबंधन के सभी घटक दलों के सदस्य शामिल हैं। आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। आम आदमी पार्टी अब औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है, हालांकि उसने इस कदम का समर्थन किया है। सूत्रों ने बताया कि कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नियमों के मुताबिक, लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला नोटिस और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर नोटिस देना होता है।
विपक्षी दलों ने कई मौकों पर सीईसी पर सत्तारूढ़ भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया है। विपक्ष मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद को लेकर पिछले कुछ महीनों से उन पर लगातार निशाना साधता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर का उद्देश्य भाजपा की मदद करना है। सीईसी को पद से हटाने का नोटिस संसद के किसी भी सदन में दिया जा सकता है और इसे अवश्य ही विशेष बहुमत से पारित किया जाना चाहिए, जो सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान में हिस्सा लेने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत होना चाहिए।

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