जामताड़ा

तेलकारी गांव की बेटी/बहू ने रचा इतिहास

सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की पहली महिला पदयात्रा से गांव में छाई खुशी की लहर               

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जामताड़ा : करमाटांड़ प्रखंड क्षेत्र के  तेलकारी गांव की एक महिला ने पहली बार सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कठिन पदयात्रा कर जलाभिषेक किया।
​भक्ति और संकल्प: पैदल कांवर यात्रा पूरी कर लौटने पर ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया।
​पति पिंटू दत्ता ने गर्व महसूस करते हुए कहा,मैं खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे ऐसी समर्पित पत्नी मिली है।”
​विस्तार से समाचार:
​झारखंड और बिहार की आस्था के केंद्र माने जाने वाले पवित्र श्रावण मास (या धार्मिक अनुष्ठानों) के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा करते हैं। इसी कड़ी में, झारखंड के तेलकारी गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक और ऐतिहासिक घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी के साथ-साथ खुशी की लहर दौड़ा न दी है। तेलकारी गांव के इतिहास में यह पहला अवसर है जब गांव की किसी महिला ने अपनी अटूट आस्था और संकल्प शक्ति के बल पर सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की पूरी यात्रा पैदल (पदयात्रा) तय करके भगवान शिव का जलाभिषेक किया है।
​इस कठिन और लंबी धार्मिक यात्रा को पूरा करना किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन इस महिला ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और भोलेनाथ के प्रति अगाध प्रेम के दम पर इस मुकाम को हासिल किया। जब से गांव वालों को यह सूचना मिली कि उनकी गांव की बहू/बेटी ने सुल्तानगंज के उत्तर वाहिनी गंगा तट से जल उठाकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को अर्पित कर दी है, तब से पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। गांव के लोग इस सफलता को ऐतिहासिक मान रहे हैं और इसे गांव के लिए गर्व का पल बता रहे हैं।
​इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे महिला के अदम्य साहस के साथ-साथ उनके परिवार, विशेषकर उनके पति का बहुत बड़ा योगदान और समर्थन रहा है। इस गौरवशाली क्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके पति पिंटू दत्ता ने मीडिया और ग्रामीणों से बात करते हुए अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं। उन्होंने गर्व के साथ कहा, “मैं आज अपने जीवन में खुद को बहुत ही सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं कि मुझे ऐसी जीवनसंगिनी (पत्नी) मिली है, जिनकी आस्था, भक्ति और संकल्प-शक्ति इतनी मजबूत है। उन्होंने जिस कठिन रास्ते को बिना थके और बिना रुके पार किया है, उसने न केवल हमारे परिवार बल्कि पूरे तेलकारी गांव का मस्तक ऊंचा कर दिया है।”
​गांव लौटने पर इस साहसी महिला का ग्रामीणों द्वारा फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस धार्मिक और ऐतिहासिक यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची श्रद्धा और पक्के इरादे के आगे बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं। तेलकारी गांव के लोग इस घटना को लंबे समय तक याद रखेंगे और यह अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बन गई है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button