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संसद में विपक्ष के आरोपों पर सरकार ने किया साफ

गोली चली ही नहीं, सिर्फ टियर गैस चली

नई दिल्ली : जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के गोली चलाने के दावों को खारिज करते हुए संसद में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर केवल टियर गैस का उपयोग हुआ था, न कि गोलीबारी। राहुल गांधी द्वारा ‘मूर्ख’ शब्द के उपयोग को ‘असंसदीय भाषा’ बताते हुए आलोचना की गई। इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच, लोकसभा ने ठएएळ विवाद के बाद ‘पेपर लीक बिल 2026’ पारित किया, जिसमें दोषियों के लिए 10 साल जेल और 50 लाख रुपये जुमार्ने का कड़ा प्रावधान है, साथ ही संगठित अपराधों में 10 करोड़ तक जुमार्ना लगेगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार, 29 जुलाई को पुलिस की ज्यादतियों को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बार-बार यह साफ किया गया कि कोई गोली नहीं चलाई गई; सिर्फ़ आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया। ऐसा आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है, मंत्री के पास नहीं। मंत्री ने लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन आॅफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर चल रही चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई असंसदीय भाषा की भी कड़ी आलोचना की।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह देखना वाकई चौंकाने वाला है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में ऐसी असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। देश के युवाओं को ‘मूर्ख’ कहने से ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? बुधवार को लोकसभा ने पेपर लीक रोकने वाला बिल — ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ — पास कर दिया। यह बिल ऐसे समय में पास हुआ जब निचले सदन में राहुल गांधी की अमित शाह के खिलाफ टिप्पणियों और इस आरोप को लेकर बार-बार हंगामा हो रहा था कि गृह मंत्री ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था।
पेपर लीक को लेकर हुए जबरदस्त विरोध-प्रदर्शनों के बाद पेश किए गए इस बिल को विपक्ष की तरफ से जोरदार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। केंद्र सरकार ने सोमवार को यह संशोधन बिल पेश किया था। यह कदम ठएएळ विवाद को लेकर देशभर में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया, जिसके कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस प्रस्तावित कानून का मकसद ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट’ में संशोधन करना है। इसके तहत परीक्षा का पेपर लीक करने में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुमार्ना शामिल है।
हाल ही में मंजूर हुए बिल में पेपर लीक मामलों की जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की गई है। इसमें गलत तरीकों में शामिल लोगों के लिए सजा को 2024 के एक्ट के तहत पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है, साथ ही 50 लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया गया है। बिल में तीन महीने के अंदर मामलों को निपटाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है। संगठित अपराधियों के लिए अधिकतम जुमार्ना मौजूदा कानून के तहत तय सीमा से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

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