
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जनपद की तहसील क्षेत्र के ग्राम बमरोला में चल रही चकबंदी प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। गांव के किसानों और ग्रामीणों ने चकबंदी लेखपाल एवं राजस्व कर्मियों पर नियमों की अनदेखी कर मनमानी करने, गरीब किसानों की भूमि में कटौती करने तथा प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और न्याय दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी के दौरान गरीब किसानों की भूमि में 20 से 30 डिसमिल तक कटौती की जा रही है, जबकि संपन्न और प्रभावशाली लोगों से कथित सांठगांठ कर उन्हें उनकी पसंद के स्थानों पर चक आवंटित किए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा है। शिकायत में ग्रामीणों ने कई उदाहरण भी प्रस्तुत किए हैं। आरोप है कि एक किसान की 9 एकड़ भूमि अभिलेखों में घटाकर 7 एकड़ दर्ज कर दी गई, जबकि मौके पर मात्र 6 एकड़ भूमि ही नापी गई। इसी प्रकार 1.80 एकड़ भूमि के स्थान पर केवल 1.62 एकड़ ही नापे जाने का आरोप लगाया गया है। किसानों ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर उनकी वर्षों से खेती होती रही और जहां सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, वहां चक देने के बजाय उन्हें सड़क के दूसरी ओर या कम उपयोगी स्थानों पर भेजा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले उन्हें पुरानी जोत के आसपास चक देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में मनमाने ढंग से बदलाव कर दिए गए। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस अनियमितता का विरोध किया तो संबंधित कर्मियों द्वारा और अधिक भूमि काटने की धमकी दी गई। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम बमरोला में चकबंदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए, भूमि की कटौती समान नियमों के तहत की जाए तथा किसानों को उनकी मूल जोत के आसपास ही चक आवंटित किया जाए। शिकायत दर्ज कराने वालों में जीवनलाल, मोहनलाल, रामलाल, मंतराम, प्रकाश, हीरा, स्वदेश, साधुराम और हरदास सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।


