गोड्डा
शहीद चानकु महतो की 170वां शहादत दिवस 15 मई को : दिनेश महतो

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। प्रत्येक वर्ष की तरह हूल विद्रोह के महानायक क्रांतिवीर शहीद चानकु महतो परगनैत की 170वां शहादत दिवस शुक्रवार को रंगमटिया गांव में स्थित स्मारक स्थल पर मनाया जाएगा।
चानकु महतो स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख योद्धा
चानकु महतो का जन्म 09 फरवरी 1816 को रंगमटिया गाँव (गोड्डा जिला) में हुआ था । इनके पिता का नाम कारू महतो उर्फ कालू महतो और माता का नाम बड़की माहताइन था। चानकु महतो ने संथाल हुल (1855-56) में सिद्धू-कान्हू को नेतृत्वकर्ता मानते हुए, विद्रोह का समर्थन कियें थें ।
30 जून 1855 ई. को भगनीड़ीह (संथाल परगना जिलान्तर्गत राजमहल सबडिवीजन के दामीन इलाकों के मध्य बाराहाइत/बड़हैत के समीप स्थित मुर्मू बंधुओं का गाँव में 400 गांवों के करीब 60 हजार संथाल, कुड़मि व अन्य आदिवासियों समेत स्थानीय लोग एकत्र हुए और हुल-हुल के एक स्वर से सशस्त्र विद्रोह का निर्णय लिया। इस सभा में सिदो मुर्मू को राजा, कान्हू को मंत्री, चाँद को प्रशासक तथा भैरव को सेनापति चुना गया। चालो जुलाहा, रामा गोप, राजवीर सिंह, बैजल बाबा, भागीरथ मांझी, बलुआ महतो आदि इनके प्रमुख साथी थे।
चानकु महतो का नारा था – आपोन माटी, आपोन दाना,पेट काटी नाँय देब खजाना..!
चानकु महतो को 15 मई 1856 ई को अंग्रेज़ों द्वारा सरेआम राजकचहरी के बगल में कझिया नदी के पास फांसी दे दिया। इसकी जानकारी हूल फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य दिनेश कुमार महतो ने दी है।



