बागपत
बरसात के मौसम में नवजात शिशु की देखभाल बेहद जरूरी
थोड़ी-सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी : डॉ. अभिनव तोमर, बाल रोग विशेषज्ञ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं नवजात शिशुओं के लिए कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे नवजात बच्चों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में माता-पिता को शिशु की देखभाल में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर के अनुसार, जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसलिए बरसात के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी बच्चे के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।
मां का दूध ही सबसे बड़ी सुरक्षा
डॉ. तोमर बताते हैं कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। मां के दूध में ऐसे एंटीबॉडी और पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चे को कई प्रकार के संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं। इस दौरान पानी, शहद, घुट्टी या अन्य कोई खाद्य पदार्थ देने से बचना चाहिए।
साफ-सफाई रखें सर्वोच्च प्राथमिकता
नवजात को छूने से पहले हर व्यक्ति को साबुन से हाथ धोने चाहिए। बच्चे के कपड़े, बिस्तर और तौलिए साफ और सूखे होने चाहिए। घर में नमी जमा न होने दें और कमरे को हवादार रखें।
गीले कपड़े तुरंत बदलें
बरसात में उमस अधिक होने के कारण बच्चे के कपड़े जल्दी गीले हो सकते हैं। गीले कपड़े लंबे समय तक पहनाने से सर्दी, त्वचा पर रैशेज और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सूती और आरामदायक कपड़ों का ही उपयोग करें।
मच्छरों से विशेष बचाव करें
बरसात में मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए शिशु को हमेशा मच्छरदानी में सुलाएं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और साफ-सफाई बनाए रखें।
डायपर का रखें विशेष ध्यान
यदि बच्चे को डायपर पहनाया जाता है तो उसे समय-समय पर बदलना जरूरी है। लंबे समय तक गीला डायपर पहनाने से डायपर रैश और त्वचा संक्रमण हो सकता है। हर बार डायपर बदलने के बाद त्वचा को अच्छी तरह साफ और सूखा करें।
भीड़भाड़ और बीमार लोगों से रखें दूर
बरसात के मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। ऐसे में नवजात को भीड़भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें। यदि घर में किसी को सर्दी, खांसी या बुखार है तो उसे बच्चे से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
टीकाकरण समय पर कराएं
डॉ. तोमर का कहना है कि नवजात का सभी टीकाकरण राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार समय पर कराना बेहद आवश्यक है। टीके बच्चे को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि बच्चे को तेज बुखार, दूध पीने में कमी, लगातार उल्टी, दस्त, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक सुस्ती, बार-बार रोना या शरीर का रंग नीला पड़ना जैसी कोई भी समस्या दिखाई दे, तो बिना देरी किए तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। स्वयं दवा देने से बचें।
डॉ. अभिनव तोमर का संदेश
“नवजात शिशु की सुरक्षा परिवार की पहली जिम्मेदारी है। बरसात के मौसम में साफ-सफाई, केवल स्तनपान, समय पर टीकाकरण और डॉक्टर की सलाह का पालन करके अधिकांश संक्रमणों से बचा जा सकता है। माता-पिता की थोड़ी-सी सावधानी बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकती है।”



