हापुड़

पिलखुवा में लापता हुए मोहित शर्मा की मौत पर परिजनों का एस पी कार्यालय पर हंगामा।

दो थानों की पुलिस की लापरवाही से दो दिन तक अस्पतालों में लावारिस घूमता रहा मोहित शर्मा , परिजनों द्वारा मेरठ से दिल्ली ले जाते रास्ते में हुई मोहित की मौत।

लापरवाही करने वाले दरोगा और सिपाही को लाइन हाजिर किया गया है । मामले में दोनों थानों की प्रारंभिक जांच कराई जा रही है- एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह

नेशनल प्रेस टाइम्स , ब्यूरो।

हापुड । आठ जुलाई की देर शाम नोएडा से हापुड़ लौटते समय लापता हुए मोहित शर्मा की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई । परिजनों ने दो थानों की पुलिस पर लापरवाही और समय पर सूचना न देने और हापुड नगर कोतवाली के इंस्पेक्टर पर बदसलूकी सहित समय पर गुमशुदगी दर्ज न करने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार  , हापुड़ नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला केशव नगर निवासी मोहित शर्मा पुत्र जितेंद्र शर्मा नोएडा स्थित एक कार कंपनी में  कार्यरत थे। आठ जुलाई की देर शाम वह रोज की तरह अपनी स्कूटी से नोएडा से हापुड़ के लिए हाइवे पर चले थे।
मोहित शर्मा के भाई  के मुताबिक , 8 जुलाई की रात तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों द्वारा लगातार फोन करने पर उनका मोबाइल फोन बंद मिला । पूरी रात परिवार और रिश्तेदारों ने अलग-अलग स्थानों पर तलाश की, लेकिन मोहित की कोई जानकारी नहीं मिल सकी ।

जानकारी के अनुसार , 8 जुलाई की देर शाम को किसी व्यक्ति ने मोहित को घायल अवस्था में पिलखुवा क्षेत्र के सरस्वती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था । सूचना मिलने पर पिलखुवा कोतवाली के दरोगा मनोज कुमार और सिपाही जीतू बाबू अस्पताल पहुंचे भी थे और गंभीर हालत में मरीज को रामा मेडिकल कॉलेज रेफर कराकर ले गए । लेकिन अब वहीं परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में मोहित की स्कूटी खड़ी थी , जिससे उनकी पहचान की जा सकती थी। लेकिन इसके बावजूद दोनों पुलिसकर्मियों ने घायल की शिनाख्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया और उन्हें अज्ञात लावारिस व्यक्ति के रूप में दर्ज कर आगे रेफर कर दिया गया । करीब दो दिन बाद 10 जुलाई को परिजनों को जानकारी मिली कि मोहित मेरठ मेडिकल कॉलेज में घायल अवस्था में भर्ती हैं। जब परिवार वहां पहुंचा तो उनकी हालत बेहद गंभीर थी। बाद में बेहतर उपचार के लिए दिल्ली ले जाते समय रास्ते में मोहित की मौत हो गई।

मृतक के भाई तरुण शर्मा ने बताया कि , परिवार दो दिन तक लगातार मोहित को तलाश रहा था, जबकि वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों ने न तो स्कूटी के आधार पर पहचान का प्रयास किया और न ही वाहन के नंबर से परिवार तक घटना की जानकारी देने की कोशिश करी । यदि पुलिस समय रहते सूचना देती तो परिवार तत्काल इलाज की व्यवस्था कर सकता था और शायद मेरे भाई मोहित की जान बच जाती ।

मृतक के परिजनों ने एस पी कार्यालय पहुंचकर एस पी कुंवर ज्ञानंजय सिंह से हापुड नगर कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर मनीष चौहान द्वारा  बदसलूकी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि जब वे गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए कोतवाली हापुड पहुंचे तो इंस्पेक्टर मनीष चौहान ने मोहित के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि “फोन बंद करके कहीं घूम रहा होगा।” इस कथित टिप्पणी से परिजनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि पुलिस ने शुरू से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया। मोहित शर्मा की मौत को लेकर पीड़ित परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि मोहित स्वस्थ अवस्था में नोएडा से निकले थे, लेकिन गंभीर हालत में अस्पताल कैसे पहुंचे, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इसी वजह से परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है ।

हापुड के एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने मोहित शर्मा मौत मामले में बताया कि ,  प्रथम दृष्टया लापरवाही करने वाले दरोगा मनोज कुमार और सिपाही जीतू बाबू को लाइन हाजिर किया गया है । मामले में दोनों थानों की प्रारंभिक जांच कराई जा रही है । लापरवाही बरतने वाला जो भी पुलिसकर्मी पाया जाएगा , उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी । हत्या या दुर्घटना से संबंधित सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है । परिजनों द्वारा आर्थिक सहायता के लिए पत्र डीएम हापुड को भेजा जाएगा । मामले में निष्पक्ष जांच की जा रही है ।

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