बागपत

बरसात के मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

छोटी लापरवाही भी पड़ सकती है भारी: डॉ. पंकज कुमार

डॉ. नीरज मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली–सहारनपुर हाईवे  बड़ौत
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
 बड़ौत : बरसात का मौसम जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं यह मौसम कई संक्रामक और जानलेवा बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में बढ़ी नमी, जलभराव, दूषित पेयजल और मच्छरों की संख्या में वृद्धि के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार, टाइफाइड, पीलिया, दस्त, उल्टी, फूड पॉइजनिंग तथा त्वचा संबंधी संक्रमण तेजी से फैलने लगते हैं। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा बचाव है।
डॉ. नीरज मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक एवं संचालक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में अस्पतालों में वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, पेट के संक्रमण, सांस संबंधी रोगों और त्वचा रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। अधिकांश लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। इसलिए किसी भी प्रकार का तेज बुखार, लगातार कमजोरी, उल्टी, दस्त, शरीर में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि बरसात के मौसम में सबसे अधिक ध्यान स्वच्छता पर देना आवश्यक है। घर, दुकान और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, पुराने टायर, पानी की टंकियों और अन्य स्थानों की नियमित सफाई करें, क्योंकि रुका हुआ पानी डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए सबसे अनुकूल स्थान होता है। यदि पूरे मोहल्ले और गांव में स्वच्छता बनी रहे तो संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इस मौसम में दूषित पानी और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले कटे हुए फल, बासी भोजन और खुले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। हमेशा ताजा, गर्म और पौष्टिक भोजन करें तथा केवल स्वच्छ या उबला हुआ पानी ही पिएं। भोजन करने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत कई संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती है।
डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा और किडनी जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें और शरीर को लंबे समय तक गीला न रहने दें, क्योंकि इससे वायरल संक्रमण और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें तथा घर और आसपास नियमित रूप से मच्छररोधी उपाय अपनाएं। यदि किसी व्यक्ति को तीन दिन से अधिक बुखार रहे, शरीर में तेज दर्द हो, प्लेटलेट्स कम होने की आशंका हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो बिना देरी किए जांच करानी चाहिए। स्वयं दवा लेने की बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।
डॉ. पंकज कुमार ने लोगों से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, पर्याप्त मात्रा में पानी, नियमित व्यायाम और भरपूर नींद शरीर को संक्रमण से लड़ने में सक्षम बनाती है। साथ ही बच्चों का टीकाकरण समय पर कराना और बुजुर्गों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। बरसात के मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है। इसलिए स्वच्छता अपनाएं, संतुलित आहार लें, मच्छरों से बचाव करें और किसी भी स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करें। समय पर उपचार से अधिकांश बीमारियों का सफल इलाज संभव है।”
अंत में डॉ. पंकज कुमार ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे अपने घर, परिवार और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें, जलभराव रोकने में सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की जागरूकता और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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