
दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने सोमवार को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की। पुलिस ने अदालत में कहा कि दोषियों ने पीड़ित पर लगातार हमला करते हुए ‘जानवरों के स्तर तक गिरकर’ अपराध किया। यह दलील अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के समक्ष दी गई। दोषियों की सजा पर कड़कड़डूमा कोर्ट में बहस हुई और अब 31 जुलाई को फैसला आएगा।
कोर्ट में पुलिस ने कहा- बेरहमी से हत्या हुई, शरीर पर 51 घाव मिले
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा का अपहरण कर बेरहमी से हत्या हुई। दोषियों ने उनकी मृत्यु के बाद भी यातना देना जारी रखा। शर्मा के शरीर पर 51 घाव मिले, जिनमें से 18 नुकीले हथियारों से थे। पांडे ने इसे सुनियोजित और जघन्य हत्या बताया।
‘हत्या के वक्त कसाई बन गए थे’-उन्होंने कहा कि दोषियों ने अपराध के दौरान “कसाई का रूप ले लिया था”। अभियोजक ने इसे 2020 दिल्ली दंगों में मारे गए 53 लोगों के संदर्भ में देखने की बात कही। पीड़ित ने कोई उकसावा नहीं दिया था, बल्कि दोषियों ने जानबूझकर हत्या की। उन्होंने दोषियों को कोई नरमी न देने की अपील की।
बचाव पक्ष की दलीलें-हुसैन के अधिवक्ताओं राजीव मोहन और तारा नरूला ने मौत की सजा का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई है। वकीलों ने बताया कि 11 आरोपियों में से छह को बरी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि मौत की सजा दुर्लभतम मामलों में ही दी जाती है और हुसैन का जेल में आचरण अच्छा रहा है।
31 जुलाई को आएगा फैसला-अदालत ने 13 जुलाई को हुसैन और चार अन्य को शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। शर्मा पर 2020 दिल्ली दंगों के दौरान भीड़ ने हमला किया, उनका शव नाले में मिला। अदालत ने कहा कि हुसैन भारी हथियारों से लैस भीड़ का सदस्य था। यह भीड़ हिंदुओं के खिलाफ दंगे, आगजनी और लूटपाट के लिए इकट्ठा हुई थी, जिसने शर्मा की बर्बर हमले में हत्या की। हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 365, 147, 148, 153ए, 188 और 149 के तहत दोषी ठहराया गया।



