खैरथल
जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने जिले में गुरुजनों का गुरुदक्षिणा, श्रीफल, शॉल व गुरु वंदन संदेश भेंट कर किया सम्मान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
खैरथल-तिजारा। माननीय मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा की पहल पर बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जिले में धर्मगुरुओं, संतों और पुजारियों के सम्मान में गुरु वंदन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भारतीय संस्कृति में गुरु परंपरा के महत्व को उजागर करने वाले इस कार्यक्रम में जिले के प्रमुख संतों को उनके आश्रमों व मंदिरों में जाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम मे महंत बलवीरनाथ, सीतावाली प्याऊ आश्रम, ग्राम जलालपुर, तिजारा, महंत दीपक नाथ, बाबा सोमनाथ धाम मंदिर, लाडपुर, कोटकासिम, महंत श्याम सुंदर महाराज, श्री हनुमान मंदिर घाटा, बम्बोरा, किशनगढ़बास, बालक दास जी, रेणागिरी आश्रम, मुण्डावर, शुभनाथ जी महाराज, मुण्डावर, श्री 1008 विमर्ष सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन अतिषय क्षेत्र तिजारा को देवस्थान विभाग की ओर से गुरुदक्षिणा 2100 रुपए नकद राशि, शॉल, फल-मिठाई और मुख्यमंत्री का विशेष संदेश देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व विधायक किशनगढ़ बास रामहेत यादव, कोटकासिम तहसीलदार धर्मेंद्र मीणा एवं सहित जनप्रतिनिधियों ने बाबा सोमनाथ धाम मंदिर, लाडपुर पहुंचकर महंत दीपक नाथ जी महाराज का सम्मान किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी प्रकार पूर्व विधायक किशनगढ़ बास, किशनगढ़बास तहसीलदार छोटे लाल मीणा सहित जनप्रतिनिधियों ने श्री हनुमान मंदिर, घाटा-बम्बोरा पहुंचकर महंत श्याम सुंदर महाराज का सम्मान किया। वहीं जिला अध्यक्ष महासिंह चौधरी, मुंडावर तहसीलदार सुमित भारद्वाज एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने रेणागिरी आश्रम पहुंचकर बालक दास जी महाराज का सम्मान करते हुए उन्हें गुरुदक्षिणा सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल, मिष्ठान एवं गुरु वंदन संदेश भेंट किया तथा पुष्पमालाएं अर्पित कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रेषित विशेष संदेश को उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष पढ़कर सुनाया गया। संदेश में गुरु के महत्व, भारतीय संस्कृति में उनके सर्वोच्च स्थान तथा जीवन निर्माण में उनकी अमूल्य भूमिका का उल्लेख किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि गुरु का सम्मान करना भारतीय सनातन संस्कृति की मूल भावना है। संत-महात्मा समाज को आध्यात्मिक दिशा देने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा में गुरु केवल शिक्षा के प्रदाता ही नहीं, बल्कि जीवन के मार्गदर्शक, चरित्र निर्माण के प्रेरणास्रोत एवं राष्ट्र निर्माण के सशक्त आधार हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संत समाज एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।


