लुंगी’वालां’ पर टिप्पणी पर भड़के सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास
नई दिल्ली। सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास ने भाजपा सांसद सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। उनका आरोप है कि देव ने संसद में टैक्स संबंधी चर्चा के दौरान उन्हें बार-बार ‘लुंगीवाला’ कहकर संबोधित किया, जो एक क्षेत्रीय और सांस्कृतिक अपमान है। इस घटना ने संसदीय मयार्दा और सदस्यों की पहचान के सम्मान पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भाजपा सांसद सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन की कार्यवाही के दौरान देव ने बार-बार उनके लिए लुंगीवाला शब्द का इस्तेमाल किया, जो सांस्कृतिक और क्षेत्रीय अपमान के बराबर है। ब्रिटास ने राज्यसभा में कामकाज के संचालन और प्रक्रिया के नियम 188 के तहत यह नोटिस दिया। उन्होंने देव की टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला उठाने की अनुमति मांगी। ब्रिटास का आरोप है कि देव ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब वह सोमवार को टैक्स से जुड़े कामकाज पर चर्चा के दौरान सदन में बोल रहे थे।
सांसद संजय सिंह ने कहा कि भारत अनेकता में एकता वाला देश है। यहाँ अलग-अलग धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं को मानने वाले लोग रहते हैं। किसी के पहनावे पर सवाल उठाना और उसका अपमान करना संस्कृति बन गई है। जिस तरह संसद में ‘लुंगी’ पहनकर आए जॉन ब्रिटास का इखढ सांसद सुष्मिता देव जी ने अपमान किया, उस मामले का चेयरमैन ने संज्ञान लिया है। सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि जब जॉन ब्रिटास सदन (राज्यसभा) में बोल रहे थे, तो उनके लिए ‘लुंगीवाला’ शब्द का इस्तेमाल करके उनका अपमान किया गया (एक अन्य सदस्य द्वारा)। यह हर भारतीय का अपमान है। हमें भारतीय होने पर गर्व है, लेकिन वे रंग, पहनावे और खान-पान के आधार पर लोगों को बांट रहे हैं।
कांग्रेस सांसद क्रिस्टोफर तिलक ने कहा कि यह बीजेपी की ओर से दक्षिण भारतीय संस्कृति का अपमान है। बात सिर्फ़ पहनावे की नहीं है। पश्चिम बंगाल के एक सांसद ने जॉन ब्रिटास को ‘लुंगीवाला’ कहा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के प्रति बीजेपी का रवैया पता चलता है। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटास ‘इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ को नामंजूर करने के लिए एक वैधानिक प्रस्ताव पेश कर रहे थे। इस पर ‘टैक्सेशन और अन्य कानून (संशोधन) बिल’ के साथ चर्चा हो रही थी, तभी यह घटना हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि देव ने बार-बार उनके भाषण में बाधा डाली और एक से ज्यादा बार उन्हें लुंगीवाला कहकर संबोधित किया।
ब्रिटास ने तर्क दिया कि यह मामला दो सांसदों के बीच निजी बहस से कहीं आगे का था; इसमें संसदीय कार्यवाही में हिस्सा ले रहे एक सदस्य को निशाना बनाने के लिए क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान का इस्तेमाल किया गया था।



